अनुदान राशि से एक ही फर्म मे खरीदी करने के मामले की जांच मे पहुंचे डी.एम.सी आखिर कारवाही कब??



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव-ःस्कूलो मे राज्य शासन की ओर से आने वाली अनुदान राशि से एक ही फर्म द्वारा सामान खरीदी के मामले की जांच करने आज राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला मिशन समन्वयक नरेन्द्र सिन्हा यहा पहुचंे थे। उनके साथ शिक्षा विभाग के सहायक संचालक किशोर केरकेटटा एवं रमसा के ए.पी.ओ बी.पी जाटवर मौजुद थे। जांच टीम ने यहा के इंदिरा गांधी कन्या स्कूल के सभाकक्ष मे समन्वयको की सम्मिलित बैठक ली,जिसमे अनुदान राशि से एक ही फर्म मे खरीदी करने के मामले की जांच करते हुये समन्वयको से लिखित दस्तावेज प्राप्त किये है,परंतु इस पूरी जांच के परिणाम आने से पहले ही जांच पर सवालियां निशान उठने लगे है। जांच मे मौजुद कुछ समन्वयको की माने तो जिले से ही जांच दल द्वारा एक फार्मेट बनाकर लाया गया था,जिसे समन्वयको को बयान दर्ज करने के लिए दिया गया,परंतु समन्वयको ने उस फार्मेट मे अपना बयान दर्ज ना कराकर अलग से दस्तावेज बनाकर जांच दल को सौंपे है। मजेदार बात यह है कि व्यापारी एवं बी.आर.सी कार्यालय से यह पूरा खेल संचालित हुआ था,बी.आर.सी कार्यालय मे बैठे कर्मचारी द्वारा अपने मोबाईल से एक ही फर्म द्वारा सामान खरीदी करने का फरमान संकुल समन्वयको के व्हाटसअप्प गु्रप मे भेजा था,जिसके बाद संकुल समन्वयको द्वारा अपने संकुल के गु्रप मे उस मैसेज को फारवर्ड कर फर्म का नाम,व्यापारी का नाम एवं उसका खाता क्रमांक भी शेयर किया था। इस पूरे कार्य मे बी.आर.सी कार्यालय के कर्मचारी द्वारा समन्वयको को स्कूलो मे सामान खरीदी करने का माध्यम बनाया था। आज कि जांच मे यह बात समझ से परे थी कि जिन समन्वयको को बी.आर.सी कार्यालय के कर्मचारी ने सामान बेचने का माध्यम बनाया उसी माध्यम से इस मामले की सत्यता का बयान दर्ज कराया जा रहा था। इस जांच को लेकर मीडिया ने तरह-तरह के सवाल उठाये है।।
शिकायतकर्ताओ मे रोष-ःबी.आर.सी कार्यालय के कर्मचारी द्वारा समन्वयको को माध्यम बनाकर एक चुनिंदा फर्म से सामान खरीदी करने के लिए जब स्कूल के प्राचार्यो को निर्देशित किया गया तो महंगे सामानो की लिस्ट देखकर स्कूल के प्राचार्यो ने विरोध करना शुरू कर दिया। यह विरोध देखते ही देखते मीडिया तक पहुंच गया,मीडिया ने इस मामले को लंबे समय तक सुर्खियों मे बनाये रखा,जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान मे लेते हुये जांच दल का गठन तो कर दिया परंतु जांच की नीति शिकायतकर्ताओ को स्पष्ट नजर नही आयी। शिकायतकर्ताओ का कहना है कि जांच दल ने समन्वयको के बयान दर्ज कर बी.आर.सी कार्यालय के दोषी अधिकारी कर्मचारीयों पर कार्यवाही करने की बात कही है,परंतु जिन समन्वयको को बी.आर.सी कार्यालय के कर्मचारी ने अपने कृत्य का हिस्सा बनाया था,उनके बयान किस तरह दोषी को उचित कार्यवाही की कगार तक लेकर जा सकते है।।
राज्य प्रशासन के पास पहुंचा मामला-ःशिकायत कर्ता अपनी शिकायत मीडिया तक ही सीमित नही रखे है। उनके द्वारा अनुदान राशि से एक ही फर्म द्वारा सामान खरीदी के दबाव को राज्य प्रशासन तक पहुंचाया गया है। शिकायत कर्ताओ का कहना था कि जिला की ओर से गठित जांच दल की टीम द्वारा सभी बातें सत्यापित होने के बाद भी यदि दोषी कर्मचारी को बचाने की कोशिश की जाती है तो आगामी समय मे यह मामला राज्य शासन प्रशासन के हर जिम्मेदार अधिकारी एवं स्वंय छ.ग. के मुखिया भूपेश बघेल तक पहुंचाने की कोशिश की जायेगी। दरअसल यह पूरा मामला स्कूलो मे आने वाली अनुदान राशि का था,इस राशि का स्कूलो मे आते ही व्यापारी एवं बी.आर.सी कार्यालय के जिम्मेदार लोगो ने अपनी नजर लगाकर बतौर कमीशन के तौर पर एक ही फर्म से घटिया एवं महंगा सामान खरीदी करने का फरमान स्कूल के प्राचार्यो तक पहुंचा दिया।।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि जल्द ही इस मामले पर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं होती है तो उनके द्वारा आगामी दिनों में छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल के जशपुर जिले के दौरे पर आने पर इस मामले की शिकायत की जावेगी।