जंगल में चली आरी, शहर में बना गोदाम और हरियाणा तक पहुंची लकड़ी! रायगढ़ में इंटर स्टेट तस्करी का बड़ा खेल बेनकाब

मुकेश अग्रवाल

जंगलों की हरियाली पर लालच की आरी चलाकर बेशकीमती खैर और तेंदू की लकड़ियों को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने वाले कथित इंटर स्टेट तस्करी सिंडिकेट का रायगढ़ पुलिस और वन विभाग ने बड़ा खुलासा किया है। धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार के वन क्षेत्रों से कथित तौर पर लकड़ियां कटवाकर गढ़उमरिया के एक गोदाम में जमा की जाती थीं और फिर फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट की आड़ में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों तक भेजे जाने का मामला सामने आया है।

 

पुलिस-वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में सिंडिकेट से जुड़े तीन मुख्य आरोपियों रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है। वहीं मामले में एक अन्य आरोपी भरत कुमार मेश्राम फरार बताया जा रहा है।

जंगल की लकड़ी से अंतर्राज्यीय कारोबार तक!

 

पुलिस के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर वन क्षेत्रों से खैर और तेंदू की लकड़ियां कटवाने के बाद उन्हें गढ़उमरिया स्थित गोदाम में डंप किया जाता था। इसके बाद लकड़ियों की छिलाई एवं अन्य प्रक्रिया कर उन्हें वाहनों के जरिए दूसरे राज्यों में भेजे जाने का आरोप है।

 

पूरे खेल को वैध दिखाने के लिए फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट यानी टीपी का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। वन विभाग को मिले एक टीपी पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जिसके बाद मामला महज अवैध लकड़ी भंडारण का न रहकर एक बड़े संगठित नेटवर्क की ओर बढ़ गया।

 

2025 की रेड ने खोली 2026 की बड़ी कहानी

 

वन विभाग को पिछले वर्ष मई में सूचना मिली थी कि जूटमिल थाना क्षेत्र के जामटीकरा (गढ़उमरिया) स्थित एक गोदाम में अवैध तरीके से खैर और तेंदू की लकड़ियां जमा की जा रही हैं।

 

5 मई 2025 को वन विभाग ने गोदाम में दबिश दी। मौके पर ट्रक क्रमांक CG-15-DV-7577 में लदे तेंदू प्रजाति के 42 लट्ठे, करीब 1.731 घन मीटर लकड़ी, वजन मशीन, कुल्हाड़ियां और हथौड़ा बरामद किया गया। इसके अलावा गोदाम से तेंदू एवं खैर प्रजाति के 146 लट्ठे, करीब 6.741 घन मीटर लकड़ी, 9 चट्टा जलाऊ लकड़ी और कटर मशीन भी जब्त की गई।

 

कार्रवाई के दौरान आरोपी मौके से फरार हो गए थे।

 

फर्जी टीपी ने बढ़ाया शक, पुलिस ने खंगाली पूरी कड़ी

 

रेड के दौरान लकड़ियों की ट्रांसपोर्टिंग से संबंधित टीपी प्रस्तुत की गई, लेकिन उस पर जारीकर्ता वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। प्रथम दृष्टया दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने के बाद वन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।

 

इसके बाद 2 सितंबर 2026 को वन विभाग की ओर से जूटमिल थाने में आवेदन दिया गया, जिसके आधार पर अपराध क्रमांक 490/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने BNS की विभिन्न धाराओं सहित भारतीय वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।

 

SSP ने बनाई स्पेशल टीम, एक-एक कड़ी जोड़कर पहुंचे आरोपियों तक

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने कथित सिंडिकेट में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू की।

 

जांच में पुलिस के अनुसार, रोहित मित्तल ने गढ़उमरिया स्थित गोदाम किराये पर लिया था। वहां मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर लकड़ियों के अवैध कारोबार को संचालित करने तथा ट्रांसपोर्टर भरत मेश्राम और सलाउद्दीन खान के माध्यम से लकड़ियों को दूसरे राज्यों में भेजने की भूमिका सामने आई।

 

जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि भरत कुमार मेश्राम की तलाश जारी है।

 

गोदाम बना था कथित ‘लकड़ी ट्रांजिट सेंटर’

 

वन विभाग की कार्रवाई में बरामद लकड़ियों की मात्रा ने भी पूरे मामले को गंभीर बना दिया। ट्रक में लदे 42 तेंदू लट्ठों के अलावा गोदाम में 146 नग तेंदू एवं खैर के लट्ठे मिले। साथ ही लकड़ी काटने और वजन करने में उपयोग होने वाले उपकरण भी बरामद किए गए।

 

अब पुलिस और वन विभाग की जांच का दायरा इस बात तक पहुंच गया है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितनी लकड़ी कटवाई, कितनी लकड़ी दूसरे राज्यों तक पहुंचाई और इस कथित कारोबार से कितना मुनाफा कमाया।

 

गिरफ्तार आरोपी

 

1. रोहित मित्तल — पिता सुभाष मित्तल, अग्रसेन कॉलोनी, विकास नगर, कोतरा रोड, रायगढ़

 

2. मनीष अग्रवाल — पिता राधेश्याम अग्रवाल, मुड़पार, बलौदाबाजार

 

3. सलाउद्दीन खान — पिता इलाउद्दीन खान, सरसींवा, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़

 

फरार आरोपी: भरत कुमार मेश्राम

 

जंगल की लकड़ी से लेकर दूसरे राज्यों के बाजार तक—पुलिस और वन विभाग अब इस कथित नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन खंगालने में जुटे हैं। मामले की विवेचना जारी है।

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