पायलट गाड़ियां आगे-आगे, गांजे से भरी सफारी पीछे-पीछे… पुलिस की घेराबंदी में बेनकाब हुआ तस्करी सिंडिकेट

नशे के सौदागरों के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन आघात” के तहत रायगढ़ पुलिस ने अंतरराज्यीय गांजा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क पर करारा प्रहार किया है। लैलूंगा पुलिस और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की सरिया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के 8 कथित गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे और तस्करी में इस्तेमाल वाहनों से 34.865 किलो गांजा, तीन कार, एक स्कूटी और 8 मोबाइल बरामद किए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 61 लाख 53 हजार 200 रुपये बताई गई है।

नाकेबंदी तोड़कर भागी सफारी, पुलिस वाहन को मारी टक्कर

पुलिस के मुताबिक, 3 सितंबर 2026 को लैलूंगा पुलिस को सूचना मिली थी कि काले रंग की टाटा सफारी क्रमांक UP 70 DF 0050 में बड़ी मात्रा में गांजा भरकर ओडिशा की ओर से लैलूंगा-पत्थलगांव होते हुए उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा है।

सूचना मिलते ही थाना प्रभारी लैलूंगा उपनिरीक्षक गिरधारी साव ने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया और पुलिस टीम ने ग्राम कमरगा में नाकेबंदी कर दी।

इसी दौरान जमुना की ओर से तेज रफ्तार सफारी आती दिखाई दी। पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया तो चालक ने कथित तौर पर पुलिस के प्राइवेट वाहन को साइड से टक्कर मारी और वाहन लेकर फरार हो गया। इसके बाद पुलिस टीम ने पीछा शुरू किया।

सफारी के आगे स्कूटी कर रही थी पायलटिंग

पीछा करते हुए पुलिस टीम ग्राम मोतीपुर के पास पहुंची तो सफारी के आगे एक स्कूटी दिखाई दी। पुलिस के अनुसार, स्कूटी सवार गगन कुमार चौधरी सफारी के लिए पायलटिंग कर रहा था।

पुलिस को देखते ही दोनों वाहनों को छोड़कर भागने का प्रयास किया गया, लेकिन घेराबंदी कर गगन कुमार चौधरी और सफारी चालक अनिल कुमार चौधरी को पकड़ लिया गया।

पूछताछ में कथित तौर पर बड़ा खुलासा हुआ—सफारी अकेली नहीं थी, बल्कि दो और कारों का काफिला उसके आगे चल रहा था और रास्ते की निगरानी कर रहा था।

एक जिले से दूसरे जिले तक दौड़ी पुलिस, दो औरा कारों ने खोला पूरा राज

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सफारी के आगे दो हुंडई औरा कारें चल रही थीं। इनका काम रास्ते में पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखना और पीछे चल रही गांजे की खेप वाली सफारी को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना बताया गया।

इधर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की सरिया पुलिस ने कंचनपुर बैरियर और बरगढ़ जाने वाले रास्ते पर संदेह के आधार पर दोनों हुंडई औरा कारों को रोक लिया।

इन वाहनों में सवार संदीप सिंह, ललित पाल, शुभम सिंह, दीपांशु सिंह, प्रिंस सिंह और देवेंद्र तिवारी से पूछताछ के बाद कथित तौर पर सफारी में गांजा होने की जानकारी सामने आई।

इसके बाद दोनों जिलों की पुलिस के बीच समन्वय हुआ और लैलूंगा पुलिस ने पीछे आ रही सफारी को घेरकर पकड़ लिया।

34 पैकेट में छिपा था 34.865 किलो गांजा

तलाशी के दौरान सफारी से 34 पैकेटों में कुल 34.865 किलो गांजा बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 17 लाख 43 हजार 200 रुपये बताई गई है।

पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त:

34.865 किलो गांजा

टाटा सफारी

2 हुंडई औरा कार

एक स्कूटी

8 मोबाइल फोन

जब्त किए हैं। कुल जब्ती की कीमत 61 लाख 53 हजार 200 रुपये बताई गई है।

मोबाइल से खुलेंगे तस्करी के और राज?

पुलिस की इस कार्रवाई में 8 मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। ऐसे में अब पुलिस के सामने इस नेटवर्क से जुड़े सप्लायर, खरीदार और अन्य संभावित सदस्यों तक पहुंचने की चुनौती है। मोबाइल और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तस्करी के नेटवर्क की अन्य कड़ियां सामने आने की संभावना है।

NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना लैलूंगा में धारा 20(B) और 29 NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।

इन 8 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अनिल कुमार चौधरी, गगन कुमार चौधरी, संदीप सिंह, ललित पाल, शुभम सिंह, दीपांशु सिंह, प्रिंस सिंह और देवेंद्र तिवारी शामिल हैं। सभी आरोपी उत्तर प्रदेश से संबंधित बताए गए हैं।

ऑपरेशन आघात के तहत बड़ा वार

रायगढ़ एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन, एडिशनल एसपी अनिल सोनी के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के कुशल मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में लैलूंगा थाना पुलिस और सरिया पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते उत्तर प्रदेश तक गांजे की खेप पहुंचाने वाले तस्करों के लिए रायगढ़ पुलिस की निगरानी लगातार कड़ी होती जा रही है। अब पुलिस की जांच इस बात पर टिकी है कि इस काफिले के पीछे और कौन-कौन से चेहरे जुड़े हैं और गांजे की सप्लाई की पूरी चेन कहां तक फैली हुई है।

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