कक्षा बारहवीं के विद्यार्थियों का आशीर्वाद समारोह शिशु मंदिर में संपन्न



मुकेश अग्रवाल/ पत्थलगांव। सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पत्थलगांव के सभा कक्ष में कक्षा द्वादश के सभी संकाय के भैया,बहनों का आशीर्वाद समारोह कक्षा एकादश के छात्र छात्राओं के द्वारा आयोजित किया गया सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों के द्वारा विद्या की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया अतिथियों का स्वागत एकादश के छात्र-छात्राओं के द्वारा किया गया। मंच पर शोभित राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल अध्यक्ष समिति पत्थलगांव , बजरंग लाल अग्रवाल रामनिवास जिंदल उपाध्यक्ष मुरारी लाल अग्रवाल व्यवस्थापक एवं जिला संचालक कांसाबेल शंकरलाल अग्रवाल सह व्यवस्थापक एवं आचार्य परिवार की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का संचालन एकादश के बच्चों के द्वारा किया गया। कक्षा बारहवीं कामर्स संकाय से पवन अग्रवाल, विज्ञान संकाय से शुभम कुमार पाढ़ी, प्रिया पाठक, हर्षिता यादव के द्वारा अनुभव कथन प्रस्तुत किया गया सभी ने इस विद्यालय की शिक्षा, संस्कार को सर्वोपरि सिद्ध किया। इस विद्यालय में सभी संकाय के विषयों के प्रशिक्षित आचार्य एवं दीदी जी हैं। उनकी भी प्रशंसा की । पवन अग्रवाल ने कहा कि मैं इस विद्यालय में कक्षा अरुण से द्वादश तक अध्ययन किया हूं। मैं इस विद्यालय का शिक्षा, संस्कार को मैं नहीं भूल सकता। किशोर भारती उपाध्यक्ष शुभम ने कहा इस विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता शिक्षा के साथ-साथ संस्कार ,चरित्रवान ,कर्तव्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा हमको प्राप्त हुई । हर्षिता यादव एवं कुमारी प्रिया पाठक ने कही कि इस विद्यालय से जो संस्कार हमें प्राप्त हुई है। वह हमारे लिए स्मरणीय है। राजेंद्र जी ने कहा सच्ची लगन परिश्रम करके हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं जिला संचालक मुरारी ने शिशु मंदिर की सराहना करते हुए कहा कि यहां की शिक्षा पूर्णत: संस्कार पर आधारित है जिसके कारण यहां पढ़ने वाला विद्यार्थी संस्कारवान की श्रेणी में आते हैं । रामनिवास जिंदल बजरंग लाल अग्रवाल शंकरलाल अग्रवाल ने भी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए आशीर्वचन प्रदान किया। विद्यालय के प्राचार्य संतोष कुमार पाढ़ी ने एकादश के भैया बहनों को धन्यवाद दिया कम समय में ईतनी अच्छी व्यवस्था उनके द्वारा की गई। द्वादश के विद्यार्थियों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि विद्यार्थी को कभी भी हतोत्साहित नहीं होनी चाहिए ।मन में आत्मविश्वास की भावना को जागृत करनी चाहिए ।परिश्रम लगन एवं लक्ष्य को लेकर कार्य करें तो निश्चित ही हम उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो रुको मत की प्रेरणा को चरितार्थ व आदर्शों को पालन करने के लिए प्रेरित किया। सभी छात्र छात्राओं को प्रोत्साहित किया। अंत में शुभ कामनाएं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना किया।