मानसून की पहली फुहारों के साथ रेंगती मौतों का कहर शुरू
रेंगती मौत से एक व्यक्ति की मौत
झाड़-फूंक के चक्कर में फस कर रेंगती मौतों के बढ़ रहे आंकड़े
शासन प्रशासन द्वारा लाखों रुपए प्रचार प्रसार के खर्च जमीनी हकीकत में बेकार

मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव -जहां एक और गर्मी की तपिश से नागरिकों के साथ मुक पशु जानवर हलकान हो चुके थे वही हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मानसून की पहली फुहारों के साथ बरसती रेंगती मौतें शुरू हो चुकी हैं जहां बारिश के साथ ही रेंगती मौत का कहर जिले के साथ क्षेत्र में शुरू हो जाता है मानसून की पहली पश फुहारों के साथ सांप अपने बिलों से निकलकर क्षेत्र के लोगों को अपना शिकार बनाते हैं जमीन पर सोए व्यक्ति या खेतों में काम करते हुए व्यक्ति का पैर जब इन जहरीले सांप पर पड़ता है तो सांप द्वारा काटे गए व्यक्ति के शरीर पर जहर फैलना शुरू हो जाता है रात में जमीन पर सोने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के मामले ज्यादा देखे जाते हैं मानसून की फुहारों के साथ ही क्षेत्र में फिर एक बार रेंगती मौतों के एवं नागलोक के नाम से प्रख्यात क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रहा है।उमस भरी गर्मी के कारण मौसम में हो रहे लगातार बदलाव के कारण बिलों से सर्प बाहर आकर फन फैलाने लगे हैं। इससे पत्थलगांव में सर्पदंश के अचानक मामले बढ़ गए हैं। विदित हो की दो दिनों से पत्थलगांव में मानसून सक्रिय होकर बारिश की फुहार क्षेत्र की जमीनों को गीली कर रही है जिसकी वजह से क्षेत्र में सर्प सक्रिय हो गए हैं। सर्प भोजन की तलाश में घरों के तरफ भी रुख कर रहे हैं।दो दिनों के भीतर तीन मामले में एक की मौत एक गम्भीर हालत मे बाहर रेफर किया गया वही एक की जान बचाने में चिकित्सक सफल रहे।
पत्थलगांव क्षेत्र में बरसात के समय बढ़ जाता है सर्पदंश का खतरा
बारिश की शुरुआत होते ही पत्थलगांव क्षेत्र में जहरीले सांपों से जान का खतरा बढ़ जाता है. सर्पदंश के कई मामले ग्रामीण क्षेत्रों से अस्पताल तक पहुंचने लगते हैं. इनमें से कुछ की मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि लोग सर्पदंश से घायल का पहले झाड़फूंक से इलाज करते हैं और जब जहर पूरे शरीर में फैल जाता है तब वे अस्पताल पहुंचते हैं. एक दिन पूर्व ही प्रशासन द्वारा लुड़ेग बंधनपुर की सर्पदंश से पीड़ित महिला हीरामणि जो सांप के जहर को निकालने के फेर में झाडफूंक करवा रही थी उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल में लाकर भर्ती कराया था यहा चिकित्सको की अथक मेहनत के बाद भी सर्पदंश पीड़ित महिला हीरामणि की गंभीर हालत पर काबू नहीं पाने से उसे बेहतर इलाज हेतु बाहर रेफर किया गया दरअसल सर्पदंश पीड़ित महिला हीरामणि झाड फूंक के चक्कर में काफी समय गवा चूँकि थी बाद में पत्थलगांव तहसीलदार रामराज सिंह ने उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल लाकर इलाज शुरू करवाया परन्तु एंटीवेनम के पर्याप्त डोज के बावजूद भी सर्पदंश पीड़ित महिला हीरामणि की गंभीर स्थिति पर काबू नहीं पाया जा सका और उसे बाहर रेफर कर दिया गया ,वही पत्थलगांव में ही चीडरापारा मोहल्ले में सर्पदंश पीड़ित एक युवक शालीन खेस को समय रहते अस्पताल लाने पर चिकित्सक उसकी जान बचाने में सफल रहे।
एक की मौत परिजन कह रहे सर्प ने सिर्फ फुंकार भरी जिससे हो गई मौत
पाराघाटी निवासी रामनाथ कुजूर पिता रामभरोस घर के बाड़ी की तरफ शाम को लगभग 6 बजे किसी काम से निकला था तभी छिपे जहरीले सर्प ने अपना जहर फुंकार मार दिया जिसके बाद रामनाथ ने घर आकर बताया की सांप ने फुंकार मारा है लेकिन काटा नहीं घरवालो ने पूरा शरीर चेक किया कही भी काटने का निशान नहीं मिलने पर वे आश्वस्त हो गए जिसके बाद सभी लोग खाना खाकर सो गए लगभग ग्यारह बजे रामनाथ को हिचकी आना शुरू हुवा जिसके बाद उसकी तबियत बिगड़ने लगी आनन फानन में उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल लाया गया जहा चिकित्सको ने उसे मृत घोषित कर दिया।मृतक रामनाथ के छोटे भाई रंजित ने बताया की सांप ने फुंकार भरकर जहर छोड़ दिया जहर के असर की वजह से भाई की मौत हो गई। फिलहाल सभी को सतर्क रहने की जरूरत है बारिश से बिलों में पानी भर गया है। इस कारण सर्प बिलों से बाहर आ रहे हैं। इस कारण सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई है। इसलिए सतर्कता बहुत जरूरी है
शासन द्वारा सर्पदंश मामलों में कमी लाने के लिए लाखों रुपए प्रचार प्रसार के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं किंतु शासन प्रशासन के यह दावे जमीनी हकीकत में खोखले साबित हो रहे हैं जहां ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ग्रामीण सर्पदंश के समय झाड़-फूंक व गुनिया के चक्कर में फस रहे हैं वही ग्रामीण जमीन पर सोने से आज भी परहेज नहीं कर रहे हैं शासन द्वारा कागजों में केवल लाखों रुपए खर्च कर सर्पदंश लोगों की कमी की आंकड़ों को बताया जाता है एवं प्रचार प्रसार पर खर्च किया जाता है यदि शासन द्वारा सही ढंग से लाखों रुपए ग्रामीण क्षेत्रों पर प्रचार प्रसार के लिए खर्च किए जाएं तो रेंगती मौतों से होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम किया जा सकता है।




