अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डॉक्टर ने कमाई के चक्कर में बनाया मेडिकल सर्टिफिकेट? मेडिकल सर्टिफिकेट आड़ लेकर लाखों रुपए का वेतन आहरण? ?पत्थलगांव एसडीएम ने दिए मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के आदेश

पत्थलगांव
पत्थलगांव स्वास्थ्य विभाग जिले में हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है चाहे मेडिकल के नाम पर अवैध वसूली का मामला हो चाहे सरकारी मकान पर कब्जा का मामला हो चाहे मरीजों को मिलने वाले खाने में घटिया खाना देने का मामला हो हमेशा से ही सुर्खियों में रहा है पत्थलगांव सिविल अस्पताल जिले में अब एक बार फिर एक डॉक्टर द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने का मामला सुर्खियों में है जहां डॉक्टर के पद पर पदस्थ डॉक्टर निषाद द्वारा एक बाबू के पद पर पदस्थ एमएस भारद्वाज को अपनी मोटी कमाई के चक्कर में 7 महीने का मेडिकल प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया वही मेडिकल विभाग के जानकार बताते हैं कि कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर 29 दिनों से ज्यादा का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकता है वही यदि महीने भर से ज्यादा का सर्टिफिकेट जारी करना हो तो इसके लिए जिले की मेडिकल बोर्ड द्वारा ही पूरी जांच के उपरांत सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं ।वही इन नियमों को दरकिनार करते हुए डॉक्टर निषाद द्वारा 7 महीने का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करना अपने आप में संदेशों को जन्म दे रहा है सूत्रों से पता चला है कि जब मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं तब उक्त डॉक्टर की ड्यूटी पत्थलगांव सिविल अस्पताल में पदस्थ नहीं थे जब तपकरा स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ थे।

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पत्थलगांव के समाजसेवी ने लाखों रुपए के मेडिकल सर्टिफिकेट से आहरण किए गए मामले के लिए पत्थलगांव एसडीएम को लिखित में शिकायत की जिसके बाद पत्थलगांव एसडीएम ने उक्त मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के लिए जांच टीम का गठन किया गया। जांच टीम में पत्थलगांव तहसीलदार रामराज सिंह एवं पत्थलगांव बीएमओ को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।

पत्थलगांव बीएमओ मिंज से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारे पास कल ही जांच के लिए मामला आया है जिसमें जांच के पश्चात हैं कोई भी बात की जा सकती है। लेकिन उनसे जब मेडिकल सर्टिफिकेट के संबंध में क्या एमबीबीएस डॉक्टर को 7 महीने का सर्टिफिकेट बनाने का अधिकार है का सवाल किया गया
तो उनके द्वारा इस बात पर टालमटोल करते नजर आए।

अब देखना यह है कि मेडिकल सर्टिफिकेट अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बनाने के मामले एवं लाखों रुपए की वेतन आहरण मामले पर जिला प्रशासन क्या कार्यवाही करता है या यूं ही हर बार की तरह मामले पर लीपापोती कर पर्दा डाल दिया जावेगा??

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