सामान्य भाषा में बोली जाने वाली पुटू सब्जी महंगी सब्जी की दुनिया में बढ़ा रही शोभा जशपुर अंचल की मंडियों में इस इकलौती कैल्शियम से भरी सब्जी का दाम सबसे अधिक,भाव सुनकर उड़ जायेंगे होश,

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मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। छत्तीसगढ़ में हरी सब्जियों का उत्पादन जितना अधिक होता है शायद ही आपको देशभर के किसी कोने में तरह तरह की हरी सब्जी देखने को मिलेगी,फिलहाल महंगी सब्जीयो की बात करें तो ना ही टमाटर,ना ही प्याज इन दिनों पत्थलगांव की मंडी में सबसे महंगी सब्जी(पुटू) के दाम आसमान पर है,यहां इस सब्जी का भाव 100–200 नहीं बल्कि पूरे 800रुपए किलो पर बिक रहे है,यह सब्जी महंगी होने के बावजूद लोगों में खरीदने की होड़ मची हुई है,किसान महज कुछ ही मिनटों में इसे बेचकर अपने घरों को लौट जा रहे हैं। दरअसल यह सब्जी छोटे आलू की तरह दिखाई देती है जिसमे मिट्टी की परत जमी होती है,मानसून के शुरुआती दौर में ही धरती के अंदर (पुटू) का मिलना शुरू हो जाता है।यह साल,सरई और सागौन के जंगलों में अधिक मात्रा में आसानी से मिल जाते है,सरगुजा क्षेत्र में जंगली मशरूम की 28 प्रजातियां पाई जाती है,मगर कुछ प्रजाति ही खाने योग्य होती है, कुछ ऐसी प्रजाति है जो बहुत ही हानिकारक हैं।

मालूम हो कि लोग बड़े ही चाव से लोग (पुटू) की सब्जी खाने को बेताब होते है,यही कारण है कि खाने वाले बड़ी कीमत चुकाकर कर इस लजीज सब्जी का स्वाद लेते है,महिलाओं, बच्चों के साथ साथ बुजुर्गों के लिए भी यह सब्जी काफी फायदेमंद होती है जिसमे भारी मात्रा में कैल्शियम पाए जाते है।हालांकि अधिक मात्रा में इस (पुटू) सब्जी के सेवन से स्वास्थ्य बिगड़ने की भी शिकायत ग्रामीण क्षेत्रों से मिलती रहती है,क्योंकि पुटू का ऊपरी हिस्सा काफी कठोर होता है जिससे इसके पाचन में अधिक समय लगता है,इसलिए लोगों को उपरी परत पर लगी मिट्टी को गर्म पानी में साफ धोकर ही उपयोग करें। बता दें कि इस बार बारिश की हल्की बूंदाबांदी हुई तब इस सब्जी का भाव 1000 रुपये प्रति किलो था,जिसके बाद लगातार 3 दिनों की बारिश के कारण अब (पुटू) के दाम प्रतिकिलो 700 से 800 रुपए पहुंच गए है।

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