“मौत का पुल बना नंदन झरिया! अंग्रेजों के जमाने का जर्जर पुल दे रहा हादसे को खुला न्योता, हर सफर बन रहा जानलेवा”

 

पत्थलगांव | जशपुर एक्सप्रेस | मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव-रायगढ़ मार्ग पर स्थित नंदन झरिया पुल इन दिनों लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि मौत का पुल बनता जा रहा है। अंग्रेजों के शासनकाल में बना यह पुराना पुल अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की अनदेखी के कारण हजारों लोग रोज अपनी जान हथेली पर रखकर इस पुल से गुजरने को मजबूर हैं।

पुल के दोनों ओर लगभग 500 मीटर तक सड़क गहरे और विशाल गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। वहीं पुल की सतह भी जगह-जगह उखड़ गई है और बड़े-बड़े गड्ढे किसी भी वक्त भीषण हादसे को न्योता दे रहे हैं। बरसात में इन गड्ढों में पानी भर जाने से खतरा कई गुना बढ़ गया है, जिससे वाहन चालकों को यह तक समझ नहीं आता कि सड़क है या मौत का जाल।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। आलम यह है कि विभागीय रिकॉर्ड में सड़क भले ही “दुरुस्त” दिखाई जा रही हो, लेकिन हकीकत में यह सड़क और पुल लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

रोजाना इस मार्ग से स्कूल बसें, एंबुलेंस, यात्री वाहन, मालवाहक ट्रक और सैकड़ों दोपहिया वाहन गुजरते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

अब निगाहें प्रशासन और लोक निर्माण विभाग पर टिकी हैं। देखना होगा कि बारिश के इस मौसम में नंदन झरिया पुल और उसके आसपास की जर्जर सड़क की तत्काल मरम्मत कर लोगों को राहत दी जाएगी या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी।

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