पत्थलगांव सिविल अस्पताल का दीवाल बना एडवरटाइजिंग के बैनर पोस्टर लगाने का अड्डा जबकि रंग रोगन में शासन के लाखों रुपये होते है खर्च

मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव के सिविल अस्पताल का स्वच्छ दीवाल आज कल एडवरटाइजिंग करने वालो के लिए सुनहरा मौका बना हुआ है पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर अपने बेनर पोस्टर को सिविल अस्पताल के दीवाल में लगा कर काटी से ठोक कर अच्छे सरकारी भवन को तहस नहस करने में जुट गए है।
जैसा कि आप सभी जानते ही है कि हमारे पत्थलगांव शहर में किसी तरह की सुविधा के लिए आम लोगो को कितनी मुश्किलो सामना करना पड़ता है चाहे वो सड़क का मुद्दा हो या अन्य जरूरी सरकारी सुविधाओं की महीनों महीनों से वर्षो वर्षो तक सुविधाएं मिलने का इंतजार करना पड़ता है।
मात्र एक सिविल अस्पताल की भारी भरकम भवन ही उपलब्ध है। उसमें भी प्राइवेट संस्था वाले अपने विज्ञापन के बैनर पोस्टर लगा कर दीवाल खराब करने में लगे हुए है।
जिस तरह से सरकारी अस्पताल के भवन में पोस्टर बेनर लगाया जा रहा है उससे ये समझना आसान होगा कि सरकारी भवनों को किस कदर खराब करने ने लोग जूट रहते है। जबकि इन्ही दिवालो के रंग रोगन में लाखों रुपये सरकार के खर्च होते है।

सिविल अस्पताल के प्रबंधन को दीवाल में लगे बेनर पोस्टर को हटाने पहले अनेक बार कहा गया है कि आप अपने कर्मचारियों से इन विज्ञापनों के बैनर पोस्टर को हटवा दे पर आज पर्यन्त तक वही हाल बना हुआ है। आज सुबह सुबह जब गांव के प्रबुद्ध जनों ने विज्ञापन के बैनर पोस्टर को सिविल अस्पताल के दिवालो में ठोक कर लगा रहे ब्यक्ति को देखा तो उसे तुरंत ही लगाए बेनर पोस्टर को हटाने कहा गया और आगे से अस्पताल के दीवाल में किसी तरह के विज्ञापन के बैनर पोस्टर नही लगाने कहा गया क्या जब एक आम शहरी सरकारी भवनों में लगाये जा रहे बेनर पोस्टर से दीवाल खराब होने की बात समझ सकते है तो फिर अस्पताल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से भागते फिरते है।
पत्थलगांव बीएमओ डॉक्टर मिंज से जब बात की जाती है तो उनके द्वारा कहा जाता है कि जल्द ही में इस तरह के विज्ञापन को हटवाता हूं लेकिन केवल बातों में ही बैनर पोस्टर हटाते नजर आते हैं जहां पूरे अस्पताल की दीवार प्राइवेट विज्ञापनो आ
पटी पड़ी इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल प्रबंधन कितना मुस्तैद है जबकि यहां प्रशासन की उच्च अधिकारी कई बार दौरा कर चुके हैं लेकिन इस तरह सिविल अस्पताल की खूबसूरती पर दाग लग रहे बैनर पोस्टर पर कभी निगाहें ही नहीं जाती है।




