दिव्यांगों से मज़ाक! पत्थलगांव शिविर में डॉक्टर नदारद, तपती धूप में घंटों तड़पते रहे सैकड़ों लोग”

“मुकेश अग्रवाल
📍 पत्थलगांव | विशेष रिपोर्ट
शासन की महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर ज़मीनी हकीकत के आगे दम तोड़ती नजर आई। पत्थलगांव में आयोजित दिव्यांगजन प्रमाणीकरण एवं यूआईडी शिविर बदइंतजामी और लापरवाही की भेंट चढ़ गया, जहां सैकड़ों दिव्यांगजन सुबह से लेकर दोपहर तक डॉक्टरों के इंतजार में परेशान होते रहे।
सुबह 10 बजे का समय देकर बुलाए गए दिव्यांगजन भारी गर्मी और तपती दोपहरी में अस्पताल परिसर पहुंचकर रजिस्ट्रेशन तो करवा लिए, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। घंटों इंतजार के बावजूद जशपुर से आने वाली डॉक्टरों की टीम मौके पर नहीं पहुंची। दोपहर 1:30 बजे तक भी डॉक्टरों का कोई अता-पता नहीं था, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ “बस पहुंच रहे हैं” का रटा-रटाया जवाब देते रहे।
😡 दिव्यांगजन बोले – “हमारे साथ खिलवाड़!”
गर्मी से बेहाल दिव्यांगजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना था कि सुबह से बिना किसी सुविधा के इंतजार करवाना सीधे-सीधे उनके साथ अन्याय और संवेदनहीनता है। कई लोगों ने प्रशासन के उच्च अधिकारियों को जमकर कोसा और इसे “दिव्यांगों के साथ मज़ाक” बताया।
☕ बीएमओ ने संभाली स्थिति
हालात बिगड़ते देख पत्थलगांव के बीएमओ डॉ. मिंज ने मानवीय पहल दिखाते हुए दिव्यांगजनों के लिए चाय-बिस्कुट की व्यवस्था कराई, जिससे कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन मूल समस्या जस की तस बनी रही।
⚠️ सवालों के घेरे में सिस्टम
एक ओर सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही योजनाओं की साख पर सवाल खड़े कर रही है। आखिरकार, समय पर नहीं पहुंचने वाले डॉक्टरों की जवाबदेही तय होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
📢 अब बड़ा सवाल:
क्या प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर दिव्यांगजनों की पीड़ा यूं ही अनसुनी रह जाएगी?




