9 साल की रिद्धांशी का कमाल: 10 मिनट में 200 मैथ्स सवाल हल कर बनी अबेकस चैंपियन शिवरीनारायण-राहौद की बेटी ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में लहराया परचम, लिस्निंग और विजुअल कैटेगरी में दिखाया अद्भुत प्रदर्शन

मुकेश अग्रवाल

राहौद/शिवरीनारायण। जिस उम्र में बच्चे जोड़-घटाव सीखने में जुटे रहते हैं, उस उम्र में राहौद की 9 वर्षीय प्रतिभाशाली बालिका रिद्धांशी साहू ने अपनी असाधारण गणितीय क्षमता से सभी को हैरान कर दिया है। कक्षा तीसरी में अध्ययनरत रिद्धांशी ने राज्य स्तरीय अबेकस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए विजुअल कम्पीटिशन में चैंपियन और लिस्निंग कम्पीटिशन में फर्स्ट रनर-अप का खिताब अपने नाम किया।

रायगढ़ के अग्रोहा धाम में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर से पहुंचे प्रतिभागियों के बीच रिद्धांशी ने अपनी तेज बुद्धि और गणना कौशल का ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्शक और निर्णायक दोनों दंग रह गए। बताया जाता है कि रिद्धांशी ने मात्र 10 मिनट में 200 मैथ्स प्रश्नों को हल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

औसत छात्रा से बनी मैथ्स की मास्टर

रिद्धांशी के पिता विश्वा साहू और माता रिंकी साहू बताते हैं कि जब उन्होंने अपनी बेटी का ऑनलाइन अबेकस क्लास में दाखिला कराया था, तब वह अन्य बच्चों की तरह गणित में एक सामान्य छात्रा थी। लेकिन नियमित अभ्यास, मेहनत और सही मार्गदर्शन ने उसे आज उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां वह अपने से बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी कड़ी टक्कर दे रही है।

परिजनों का कहना है कि आज रिद्धांशी के लिए गणित किसी खेल से कम नहीं है। जहां कई बड़े लोग साधारण हिसाब-किताब के लिए कैलकुलेटर का सहारा लेते हैं, वहीं रिद्धांशी कठिन से कठिन गणितीय सवालों को पलक झपकते हल कर देती है।

अबेकस ने बदली सोच, बढ़ाया आत्मविश्वास

रिद्धांशी की प्रशिक्षिका रेणुका शर्मा बताती हैं कि अबेकस केवल गणित सिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के संपूर्ण मानसिक विकास का एक प्रभावी तरीका है। 6 से 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित इस प्रशिक्षण में सप्ताह में दो दिन ऑनलाइन कक्षाएं ली जाती हैं, जहां नौ अलग-अलग स्तरों के माध्यम से बच्चों की गणना क्षमता, स्मरण शक्ति, सुनने और समझने की क्षमता तथा एकाग्रता को विकसित किया जाता है।

उन्होंने बताया कि विशेष फ्लैश कार्ड एक्टिविटी, ब्रेन डेवलपमेंट एक्सरसाइज और स्पीड प्रैक्टिस के जरिए बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और गणित का डर पूरी तरह खत्म हो जाता है। यही कारण है कि अबेकस सीखने वाले बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक तेज, स्मार्ट और पढ़ाई में आगे निकलते हैं।

क्षेत्र में खुशी की लहर

रिद्धांशी की इस उपलब्धि से राहौद और शिवरीनारायण क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिजन, शिक्षक और शुभचिंतक उसकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। इतनी कम उम्र में राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रिद्धांशी ने न केवल अपने माता-पिता और गुरु का नाम रोशन किया है, बल्कि क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

 

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