बारिश होते ही पानी टपकने वाला करोड़ों रुपए का अनोखा सिविल अस्पताल


पत्थलगांव/मुकेश अग्रवाल
करोड़ों रुपए के सिविल अस्पताल में बारिश के मौसम में बारिश होते ही सिविल अस्पताल की छत टपकने लगती हैं जहां सिविल अस्पताल मरीज को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है एवं सिविल अस्पताल में प्रशासन द्वारा महंगे महंगे चिकित्सा उपकरण भेजे गए हैं जो या तो स्टोर रूम में पड़े पड़े ही अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं या पानी के शिलन एवं छत टपकने की वजह से महंगे चिकित्सा उपकरण खराब होने के कगार पर पहुंच रहे हैं। पत्थलगांव सिविल अस्पताल में एक्स-रे रूम का निर्माण किया गया है जिस एक्स-रे रूम में बरसात के दिनों में पानी टपकने की वजह से एक्स-रे रूम की हालत पानी भरने की वजह से खराब हो जाती है जहां मरीजों को एक्स-रे करवाने के लिए दो-चार होना पड़ता है सिविल अस्पताल का मुख्य दरवाजा जहां से होकर इमरजेंसी मरीजों के साथ अन्य मरीज भी पहुंचते हैं किंतु बरसात के दिनों में करोड़ों रुपए के इस सरकार द्वारा निर्मित अस्पताल में मुख्य दरवाजे पर ही पानी टपकता हुए पानी की वजह से मुख्य दरवाजा पानी भरा रहता है जहां में दरवाजे से होकर मरीजों को काफी दिक्कतों से अस्पताल की दहलीज पर पहुंचना पड़ता है वही हाल डॉक्टर के केबिन का भी नजर आता है जहां डॉक्टर के एक-दो कमरों में बारिश का पानी टपक रहा है ।
विगत कुछ माह पूर्व सिविल अस्पताल में लाखों रुपए खर्च कर पानी टपकने की समस्या से निदान करने के लिए ठेकेदार के माध्यम से कार्य करवाया गया था किंतु लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी अस्पताल की हालत जस की तस नजर आ रही है सिविल अस्पताल में बारिश के मौसम में चारों तरफ अस्पताल में पानी टपकता नजर आता है ।अस्पताल मानो ऐसा नजर आता है जैसा कोई छप्पर लगी बिल्डिंग बनी हो।
अस्पताल के वार्ड रूम भी बारिश की वजह से काफी जर्जर हालत में पहुंच चुका है अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर कुछ नजर नहीं आता है। मरीज को खून जांच करवाने के लिए बनाए गए दरवाजे तक पहुंचाने के लिए पुराने अस्पताल के दरवाजे से होकर पहुंचना पड़ता है जहां दरवाजे से पहले प्रांगण बारिश की वजह से तालाब में तब्दील हो जाता है जहां बड़े-बड़े गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं विगत कुछ महापुर पूर्व कलेक्टर द्वारा सिविल अस्पताल के दौरे के समय पुराने अस्पताल परिसर के लैब के बाहर गधों को भरने एवं पूरे ब्लॉक लगाने के लिए निर्देशित किया था किंतु उनके जाते ही स्थिति जस की 10 नजर आती है अस्पताल परेशान में शौचायलयों की स्थिति बाद से बदतर हो चुकी है जहां शौचालय में दुर्गंध की वजह से मरीज के साथ उनके परिजनों को नाक में रुमाल रखकर ही पार होते देखा जा सकता है। शौचायलयों की दुर्गंध से बचाने के लिए शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च कर अस्पताल परिसर के बाजू में शौचालय का निर्माण किया गया था जो शौचालय बिना उद्घाटन किये ही कबाड़ की स्थिति में पहुंच चुका है ।आखिर शासन के लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी पत्थलगांव क्षेत्र के नागरिकों को बढ़िया इलाज के लिए महंगे शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है आखिर स्वास्थ्य विभाग की इन सभी समस्याओं की जिम्मेदारी किसकी??

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