पूरे जिले में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला
झोलाछाप डॉक्टर के गलत इंजेक्शन इलाज से युवती ने गंवायी अपनी जान
जिले में झोलाछाप डॉक्टरों पर कारवाही के नाम पर केवल खानापूर्ति

मुकेश अग्रवाल
बगीचा
जानकारी के मुताबिक सुलेसा के रहने वाला ललित बुधवार को बैंक के किसी काम से अपनी बेटी पूर्णिमा के साथ बगीचा आया था । काम खत्म होने के बाद वह अपनी बेटी पुर्णिमा को सर्दी बुखार का ईलाज कराने बगीचा के एक झोला छाप डॉक्टर राज खूंटे के पास ले गया ।डॉक्टर ने जांच करने के बाद बताया कि कमजोरी है इंजेक्शन देने के बाद ठीक हो जाएगा।
डॉक्टर राज खूंटे ने पूर्णिमा को इंजेक्शन लगाया और इंजेक्शन लगते ही वह बेहोश हो गई । उसके बेहोश होने के बाद डॉक्टर ने ललित को बताया कि कमजोरी के चलते बेहोश हो गई है उसे अम्बिकापुर मिशन ले जाओ। अम्बिकापुर ले जाने के लिए डॉक्टर ने खुद से गाड़ी ठीक किया और ललित को 5 हजार रुपये भी दिए ।ललित बेटी को लेकर अम्बिकापुर मिशन अस्प्ताल पहुंचा लेकिन तबतक उसकी मौत हो चुकी थी । ललित यादब ने दूरभाष पर बताया कि वह डॉक्टर से सम्पर्क करने की कोशिश कर रहा है लेकिन डॉक्टर का मोबाईल बंद बता रहा है ।इस मामले में अभी तक किसी प्रकार की कोई शिकायत नही हुई है । ललित ने बताया कि अम्बिकापुर पुलिस को उसने बयान में सारा कुछ बता दिया है ।
बगिचा थाना प्रभारी ने बताया कि अभी तक इस तरह की कोई रिपोर्ट नही आई है। झोला छाप डॉक्टर से फोन पर सम्पर्क कर मामले को समझने की कोशिश की गई और डॉक्टर का पक्ष जानना चाहा तो डॉक्टर के जगह किसी ओर ने फोन उठाया और बताया कि डॉक्टर साहब नहीं है। सुलेसा गाव के उपसरपंच ने बताया कि उक्त डॉक्टर बगीचा के एक मेडिकल दुकान में बैठता है
पूरे जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ से आ चुकी है जहां झोलाछाप डॉक्टर फर्जी डिग्री के सहारे लोगों की मौत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं वही चिकित्सा विभाग के अधिकारी अपनी जेब भरने में मशगूल नजर आते हैं पूरे जिले में यदा-कदा एकाद झोलाछाप डॉक्टर के ऊपर कार्यवाही की जाती है जो कुछ दिनों बाद फिर से वही झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकानदारी करने में मशगूल हो जाते हैं लेकिन जिले में पदस्थ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर कार्यवाही करना तो दूर अपनी कमाई करते दिखाई देते हैं हर जगह सरकारी हॉस्पिटल के पास झोलाछाप डॉक्टर अपनी पैठ बना चुके हैं एवं शासकीय अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक अपने कमीशन के कारण इन झोलाछाप डॉक्टरों के पास मरीजों को खुलेआम भेजते नजर आते हैं।

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