2 हफ्ते से संजीवनी एक्सप्रेस की निकला दम
पत्थलगांव क्षेत्र के लोगों को संजीवनी एक्सप्रेस का नहीं मिल रहा लाभ
शासन की योजनाओं में बट्टा लगा रहे अधिकारी आखिर जिम्मेदार कौन??
मुक्तांजलि वाहन भी गिन रही अंतिम सांस

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मुकेश अग्रवाल/पत्थलगांव। पत्थलगांव के क्षेत्र वासियों को 12 दिनों 108 एम्बुलेंस की सुविधा नही मिल पा रही है। जिसकी वजह से उनके जेब मे खर्च का अधिक बोझ बढ़ जा रहा है, वही इस परेशानी से गरीब तबके के लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं घायलों एवम अन्य प्रकार से जरूरतमंद लोगों को निजी वाहन से इलाज के लिए अस्पताल आना और अन्य जिलों में बेहतर ईलाज हेतु बाहर जाना पड़ता है।

एक और जहां छत्तीसगढ़ सरकार छत्तीसगढ़ निवासियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने की बात करती है वही 12 दिनों से 108 एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिलने के कारण लोग परेशान हैं । बता दे कि नगर और ग्रामीण अंचलों के मरीजों के लिए शुरू की गई 108 एम्बुलेंस सेवा का लाभ 12 दिनों से लोगोंं को नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण ग्रामीण मरीजों और परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में पिछले 12 दिन से एम्बुलेंस के पहिए जाम है। यहां के जरूरतमंद निजी वाहन या ऑटो से इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं। बिगड़ती 108 की सेवा की ओर किसी का ध्यान नहीं है। मरीजों या दुर्घटना में घायलों को उपचार के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू तो की गई है लेकिन सिविल अस्पताल में पिछले 12 दिन से एम्बुलेंस सेवा बंद है। वाहन अधिक चल जाने के कारण, इसकी सेवा नहीं मिल पा रही है। बताया गया है कि एम्बुलेंस करीब 2.53 लाख से अधिक किलोमीटर दौड़ चुकी है, जिसके कारण वाहन का दम निकल गया है। इस ओर संचालन कम्पनी का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है।नियामानुसार, अधिक उपयोग होने के बाद दूसरा वाहन सेवा के लिए उपलब्ध कराना था, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। यहां वाहन का रखरखाव भी नहीं किया जाता है। एम्बुलेंस बंद होने के कारण, परिजन मरीजों को निजी वाहन से लेकर हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं। जिससे प्रसूताओं एवम दुर्घटनाग्रस्त लोगों को परेशानी हो रही है। कई मामले में वाहन भी नहीं मिल रहे है। इस ओर स्वास्थ्य विभाग का ध्यान नहीं है। वहीं आज एक मामला पत्थलगांव के चिडरापारा निवासी भगमनिया लकड़ा, पति रवि लकड़ा जो कि पत्नी की स्थिति को देखते हुवे 102 एवम 108 से सम्पर्क किया पर वाहन की उपलब्धता न होनर के कारण दोनो ने अपने हाथ खड़े कर दिये, और 45 km दूर कोतबा या फरसाबहार से वाहन मुहैया कराने की बात कही, परन्तु आने का इतजार करने में काफी समय लग जाता। जिसके वजह से पत्नी की हालत को देखते हुवे उन्हें निजी वाहन से बाहर ले जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि गरीब तबके के लोगो को 108 की सेवा नही मिलने के कारण जेब मे इलाज की समस्या के साथ साथ वाहन का अधिक बोझ बढ़ जा रहा है, शासन प्रशासन को इस ओर ध्यानाकर्षण की आवश्यकता है। इस मामले बीएमओ मिंज का कहना है कि हमने संचालन कम्पनी से बात की है अधिक चलने के कारण अभी सेवा बंद है उनके द्वारा जल्द ही नई एम्बुलेंस देने की बात कही गई है।
पत्थलगांव की मुक्तांजलि वाहन जर्जर एवं अंतिम कबाड़ की स्थिति में पहुंच चुकी है मुक्तांजलि वाहन में शव रखते ही मुक्तांजलि वाहन का दम निकल जाता है मुक्तांजलि वाहन कबाड़ में बदल चुकी है। कई बार शव वाहन के कबाड़ में बदल चुके होने के कारण शव वाहन खराब पड़ा रहता है जिसके कारण मरीज शोले जाने के लिए प्राइवेट वाहन ढूंढते नजर आते हैं प्रशासन द्वारा क्षेत्र के लोगों को शव वाहन की सुविधा तो दी गई है लेकिन शव वाहन के रखरखाव के अभाव में कबाड़ में बदल चुका है यदि जल्द ही मुक्तांजलि वाहन पर ध्यान नहीं दिया गया तो संजीवनी एक्सप्रेस की तरह मुक्तांजलि वाहन भी क्षेत्र के लोगों को सेवा देने में नदारद नजर आएगा।

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