मशीन की गति से मशीन से कट रहे पेड़ अंधाधुध
पेड़ कटाई से पर्यावरण पर पड रहा विपरीत असर



पत्थलगांव/मुकेश अग्रवाल
एक और जहां बारिश के दिनों में पर्यावरण प्रेमी के साथ प्रशासन के अधिकारी पेड़ पौधे लगाकर पर्यावरण की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे वहीं दूसरी ओर गर्मी के मौसम में लगातार जलाऊ लकड़ी के लिए क्षेत्र के लोगों द्वारा अपने खेत के पास लगे पौधे की आड़ में सड़क किनारे सरकारी भूमि पर लगे बबूल एवं अन्य प्रजाति के पौधों को मशीन की गति से मशीन से चंद मिनटों में ही काट कर धराशाई कर पेड़ों को आसपास की फैक्ट्रियों में जलाऊ लकड़ी के काम में बेचकर मुनाफा कमाने के लिए लगातार अंधाधुध पेड़ों की कटाई की जा रही है। पेड़ों की कटाई दिनदहाड़े बिना बिजली के पेट्रोल से चलने वाली मशीनों के द्वारा करते हुए काटे गए पेड़ों को चंद मिनटों में ही टुकड़ों में बदलकर आसपास की फैक्ट्रियों में एवं ईट भट्ठा में डालकर लकड़ियों को भेंट चढाई जा रही है ।
नगर के आसपास जाने वाले मार्ग पालीडीह कुमेकेला मार्ग सहित आसपास के खेतों में दिन रात मशीनों की आवाज सुनाई दे रही है जहां सरकारी जमीन किनारे लगे पेड़ों को भी नहीं बख्शा जा रहा है।
आधुनिक मशीनें द्वारा सड़क किनारे लगे बबूल एवं अन्य प्रजाति के पौधों पर लगातार ही लकड़ी काटने वालों का कहर बरब रहा है जिसके कारण सड़क किनारे लगे पेड़ पौधे जो आने जाने वाले राहगीरों को छाया के साथ गर्मी से राहत देते थे वे पौधे आजकल ठूंठ में बदल चुके हैं ।जिसके कारण राहगीर छाया के लिए तड़प रहे हैं पेड़ पौधे को इस कदर मशीनों से काटा जा रहा है जिसका सहज अंदाजा सड़क किनारे ठुंठ को देखकर लगाया जा सकता है।
वन विभाग व राजस्व विभाग के अधिकारियों से जब अंधाधुध पेड़ की कटाई के संबंध में बात की जाती है तो उनके द्वारा बताया गया कि शासन ने लकड़ियों का काटने की छूट दे रखी है जिसके कारण लकड़ी काटने वाले बेखौफ होकर पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं किंतु निजी भूमि पर पेड़ कटाई की शासन ने परमिशन दी है इसी की आड़ में पेड़ काटने वाले सड़क किनारे लगे शासकीय भूमि पर लगे पेड़ों को भी अपना निशाना बना रहे हैं जिन पेड़ों पर भी प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी ध्यान नहीं देते हैं।
पर्यावरण संतुलन हो रहा खराब क्षेत्र में लगातार अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संतुलन पर काफी गहरा असर पड़ रहा है एक और जहां पर्यावरण का संतुलन पूर्ण रूप से गड़बड़ा चुका है जहां मानसून, गर्मी के मौसम में लगातार पेड़ पौधों की कटाई का विपरीत असर पड़ रहा है
जल्द ही शासन प्रशासन एवं लकड़ी काटने वालों पर विराम नहीं लगाया जावेगा तो वह दिन दूर नहीं होंगे जब पर्यावरण के साथ पानी एवं हवा के लिए भी नागरिक तरसते नजर आएंगे ।जल्द ही शासन प्रशासन को इस ओर कड़े कदम उठाने चाहिए??


