सेवा भारती कन्या छात्रावास में रंगारंग वार्षिकोत्सव एवं अभिभावक स्नेह सम्मेलन संपन्न,? छात्राओं ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर लोगो का मन मोहा



मुकेश अग्रवालपत्थलगांव । नगर के सेवा भारती कन्या छात्रावास परिसर में आज वार्षिक उत्सव एवं स्नेह सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बतौर कनाडा से आए सेवा इंटरनेशनल के अनिल विज एवं,अध्यक्षता राष्ट्रीय सेवा भारती के संयुक्त महामंत्री विजय पुराणिक ने की, विशिष्ट अतिथि के रूप में कनाडा सेवा इंटरनेशनल श्रीमती रीना विज,सह प्रांत प्रचारक नारायण नामदेव,क्षेत्रीय संगठन मंत्री रामेंद्र सिंह,अध्यक्ष सेवा भारती बिलासपुर शांतनु मुखोपाध्याय,एवम जिला सरसंघचालक मुरारीलाल अग्रवाल,राजेंद्र अग्रवाल,प्रयागराज अग्रवाल,डॉ बीएल भगत,सुनील अग्रवाल,अनिल मित्तल,सुरेंद्र बेसरा,सतीश मिश्रा मौजूद रहे।वहीं कार्यक्रम का सफल संचालन सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य संतोष कुमार पाढ़ी ने किया।
शिक्षक शिक्षिकाओं में अश्विनी गुप्ता,संजय यादव,गोवर्धन यादव,श्रीमती इंदिरा पटनायक, कु. सिलीना मिंज,कु.राखी यादव,श्रीमती मिथुला यादव,कु. नीलमणि भगत का सराहनीय योगदान रहा। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम की
शुरुआत में अंशु पैंकरा एवम साथी ने बिरसा भगवान के गीतों “करीला तोके प्रणाम करिला तोके नमन” पर सेवा भारती की छात्राओं ने शानदार नृत्य की प्रस्तुति दी। जिसके बाद नेहा पैंकरा एवम साथियों ने छत्तीसगढ़ी नृत्य “तोला गाढ़ा गाढ़ा जोहार” में आकर्षक वेशभूषा में प्रस्तुति दी।तत्पश्चात प्रेरणा भगत एवं साथी ने उड़िया गाने पर उपस्थित अथितियो का मन मोह लिया।इसी क्रम में एकलगीत, कर्मा, सुवा नृत्य, एवम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर नाटक समेत अनेक प्रस्तुति देते हुए सेवा भारती की छात्राओं ने अपनी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन दिखाया।एवम शिशु मंदिर विद्यालय के आचार्य बहादुर दास महंत, डेमुधर बंजारा,दिलबंधु यादव ने वाद्य यंत्रों का वादन किया।वहीं तालियों को गूंज से उपस्थित अभिभावकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
इस मौके पर सह प्रांत प्रचारक नारायण देव ने कहा कि सेवा भारती संस्था लगातार कार्य कर रही है।पत्थलगांव अंबिकापुर मनेन्द्रगढ़, कोरबा कुनकुरी लैलूंगा कांकेर में 7 छात्रावास कन्या आदिवासी एवम बिलासपुर और भिलाई में 2 छात्रावास युवाओं के लिए प्रारंभ किया है।संस्कार केंद्र,सिलाई केंद्र कोचिंग सेंटर एवम सेवा विद्या मंदिर अंग्रेजी माध्यम बिलासपुर में संचालित हो रहे है।
शारीरिक और बौद्धिक विकास के लिए बिलासपुर में भी छात्रावास संचालित हो रहे है। एवम प्रांत में 7 जगहों पर मातृ छाया(दत्तक ग्रहण एजेंसी) संचालित की जा रही है।छग सेवा भारती संस्थापक भास्कर वर्तक ने कहा कि हमारे देश में संत महापुरुषों की प्रेरणा से सेवा भारती संस्था संचालित कर रहे है।एवम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रेरणा से आज विभिन्न जगह सेवाएं प्रदान कर रहे है शारीरिक मानसिक ढंग से प्रदेश के लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है उन्होंने उपस्थित लोगों को स्वावलंबी बनने प्रेरित किया कहा कि हम सभी के प्रयासो और लोगों से संपर्क करके ही सेवा भाव से कार्य किया जा सकता है ।संयुक्त महामंत्री विजय पुराणिक ने कहा कि जो घर से दूर रहते हुए भी अपनो को नहीं भूले आज देश में उनकी समस्याओं को कम करने का एक प्रयास किया जा रहा है।जिससे पूरे देशभर में सेवा भारती की उपलब्धि देखने को मिलती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के आध्यात्मिक वाक्य भी प्रस्तुत किए उन्होंने कहा कि आज सेवा ही सर्वोपरि है। सेवा भारती संस्था महापुरुषों और स्वामी विवेकानंद के मार्गों पर चलने वाली संस्था है पूरे भारत में 450 छात्रावास संचालित किए जा रहे है अरुणाचल प्रदेश से लेकर जम्मू कश्मीर तक लोग छात्रावास में विविध प्रकार के सेवा कार्यों के माध्यम से जुटे हुए है।उन्होंने प्रेरणा वक्तव्य देते हुए कहा अगर भारत निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को विकसित रूप से तैयार करना होगा,जब व्यक्ति तैयार हो जाएगा तो तब संपूर्ण भारत एक हो जाएगा। जो व्यक्तिगत जीवन में उन्नति का स्वप्न लेकर चलने वाले है उन्हे सेवा भारती संस्था के माध्यम से आध्यात्मिकता को बढ़ावा देना है। उत्तरदायित्वों को साथ लेकर चलने का ज्ञान इस संस्था के माध्यम से प्राप्त होता है। इस संस्था का उद्देश्य बेटियों को राष्ट्रीय एकात्मता का संस्कार और दिशा देने का है। एवं राष्ट्रवाद का झंडा हाथ में लिए अनेक युवती युवतियां आज हम देखते है।मुख्यअतिथि अनिल विज ने कहा कि हम कौन है और क्या है यह प्रश्न मन में बार बार उठता है। भारत से बाहर लगभग करीब 4करोड़ हिंदू रहते है समय समय पर वे कुछ न कुछ अपने धर्म और समाज के लिए करने की सोचते है एवं अनेको चुनौतियां उनके सामने आती है। भारतीय होने के नाते हमने विदेशों में भी एक प्रतिष्ठा प्राप्त करी है। हमारे देश की संस्कृतियों को विदेशों में कैसे फैलाया जाए यही कार्य में हम लगे है। उन्होंने कहा सन 1800 ई. में 7 लाख गुरुकुल होते थे आज गिनती के ही है। हमारी शिक्षा प्रणाली को समाप्त करने विदेशियों आक्रमताओं द्वारा भर्षक प्रयास किया गया जिससे समाज में अशांति फैले और भारतीयों के जीवन से जुड़े मूल्यों को विभाजित किया जा सके।आज सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम क्या है उसकी परिभाषा जाननी आवश्यक है। भारत तीव्र गति से अग्रसर कैसे हो सके ऐसी हमे सोच रखनी होगी।भारत वर्ष को सोने की चिड़िया कहा जाता है क्योंकि यहां वैभव और समृद्धि भरी हुई है।ज्ञानी और ऋषियों ने धर्म और समाज के उत्थान हेतु अनेकों प्रयास किए।उन्होंने कहा कि हम सभी को निर्णय लेना होगा की हम राष्ट्र को संगठित करने और इस समाज के लिए उठ खड़े हों।यह राष्ट्र जरूर उठेगा मानवता को मार्ग देना होगा जो हमारे पूर्वज देते आए।आलस्य को छोड़कर भविष्य को साथ लेकर चलना होगा। प्राचीन भारत की संस्कृति को कैसे संजो कर रखा जाए यही हमारे लिए असली चुनौती है।