छोटे जुआड़ियों पर गाज गिरा कर लगी पुलिस अपनी पीठ थपथपवाने में लगी ?✴️मगरमच्छ जुआडी पुलिस पहुंच के बाहर

मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव
जंगलों में रोज की भांति जुआ चल रहा था पुलिस ने छोटे जुआडीयो को घेराबंदी कर 5 जुआड़ियों को रंगे हाथ पकड़ते हुए ₹2700 सौ रूपयों की जब्ती बना दी पुलिस इस कार्यवाही के बाद चैन की सांस लेने की सोच रही है परंतु क्या पांच जुआड़ी पकड़ने के बाद पुलिस यूं ही अपनी पीठ थपथपवाती नजर आएगी ।मीडिया के समाचार प्रकाशन होने के बाद 5 ग्रामीणों जुआड़ियों को पकड़कर पुलिस वाह वाही तो जरूर लूट रही है परंतु पुलिस की नजर जुआ के धंधे में संलिप्त रसूखदार जुआरी एवं जुआ के अड्डे का संचालन करने वालों पर अब तक नहीं पड पाई है यही कारण है कि लंबे अरसे से शहर के होटल ,ढाबों के अलावा यहां के घने जंगलों के 52 परियों का शौक आजमाने हर रोज दर्जनों की तादाद में जुआड़ी एक साथ एक फड में बैठकर लाखों रुपए का दांव लगा रहे हैं आसपास के जुआड़ियों के अलावा प्रतापगढ़ ,सीतापुर ,कांसाबेल ,लेलूंगा ,धर्मजयगढ़ से जुआडी यहां आकर ताश पत्ते फेटते दिखाई देते हैं जुआ खेलने एवं खिलाने के बीच फंड संचालकों की भूमिका अहम मानी जाती है जुआ खिलाने के बीच जुआड़ियों से मोटी रकम की भरपाई करते हैं जिसे नाल का नाम दिया जाता है सूत्र बताते हैं कि नाल के रूप में निकलने वाले रुपयों का कुछ हिस्सा पुलिस तक पहुंच जाता है हालांकि इस बात से पुलिस के बड़े अधिकारी अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं तो क्या ऐसे में क्षेत्र से जुआ के अड्डे पूरी तरह से बंद हो पाएंगे ??पुलिस को जरूरत है कि छोटे जुआड़ियों पर कार्रवाई की गाज गिरा कर पीठ थपथपवाने से अच्छा जुआ के क्षेत्र में पांव पसार चुके मगरमच्छों के ऊपर कार्यवाही कर पाने का काम करें।
अब देखना यह है कि पुलिस इन लाखों रुपए के फड़ के अड्डे तक कब अपनी पहुंच कर पाती है! या यूं ही छोटे जुआडीयो पर पर कार्यवाही कर अपनी पीठ थपथपाते रहेगी??

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