दो पदों पर एक ही राज डीपीसी रहते हुए प्रभारी DEO बने नरेंद्र सिन्हा, नियम ताक पर

मुकेश अग्रवाल
/ जशपुर जिले के शिक्षा विभाग में एक बार फिर दोहरे पदों पर कब्जे का खेल उजागर हुआ है। जिला मिशन समन्वयक (जिला डीपीसी) के अहम पद पर पदस्थ नरेंद्र सिन्हा अब प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के पद पर भी काबिज हो गए हैं। एक ही अधिकारी के पास दो-दो महत्वपूर्ण विभागों की कमान होने से न सिर्फ विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रमन सरकार के राजपत्रित आदेश को किया दरकिनार
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में शिक्षा विभाग में सुधार और पारदर्शिता के लिए राजपत्र में स्पष्ट प्रावधान किया गया था। इसके तहत जिले के सबसे वरिष्ठ (सीनियर) प्राचार्य को ही जिला शिक्षा अधिकारी बनाया जाना प्रस्तावित था। इसी तरह ब्लॉक स्तर पर विकासखंड के सीनियर प्राचार्य को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) तथा ब्लॉक के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रधान पाठक को बीआरसी एवं मंडल संयोजक के पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
इस व्यवस्था के पीछे मंशा साफ थी कि अनुभवी और वरिष्ठ शिक्षकों के हाथों में शिक्षा विभाग की कमान रहे, ताकि शिक्षा का स्तर सुधरे।
नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति, शिक्षा का स्तर लुढ़का
लेकिन मौजूदा समय में शासन के इन स्पष्ट निर्देशों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से पद भरे जा रहे हैं। जिला मिशन समन्वयक जैसे पूर्णकालिक और महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए भी अतिरिक्त रूप से DEO का प्रभार दे दिया गया है।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि दो-दो पदों पर एक ही व्यक्ति के काबिज रहने से दोनों ही विभागों का काम प्रभावित हो रहा है। न तो समग्र शिक्षा मिशन के कार्य समय पर पूरे हो रहे हैं और न ही DEO कार्यालय से जुड़ी फाइलें, शिक्षकों की पदोन्नति, स्थानांतरण और स्कूलों की मॉनिटरिंग का काम हो पा रहा है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर छात्रों और शिक्षा की गुणवत्ता को भुगतना पड़ रहा है।
बलरामपुर बना जीता-जागता उदाहरण, जशपुर में भी बड़े खेल की आशंका
अब शिक्षक संगठनों और शिक्षा से जुड़े लोगों में इस बात को लेकर चिंता गहरा गई है कि कहीं उसी तर्ज पर जशपुर जिले में भी कोई बड़ा खेल न हो जाए। यदि जशपुर में भी सीनियर प्राचार्यों की वरिष्ठता को दरकिनार कर इसी तरह दोहरे पदों पर कब्जे की परंपरा दोहराई गई, तो यहां की शिक्षा व्यवस्था के भी चरमराने से इंकार नहीं किया जा सकता।