मंदिर से स्वर्गरथ तक सेवा की सौगात, मदनलाल अग्रवाल ने दान से नहीं, अपने काम से बनाई पहचान अग्रसेन जयंती के मंच पर वरिष्ठ समाजसेवी का सम्मान, दस दिनों तक पानी की बोतलों से लेकर जरूरतमंदों के सहारे तक निभाते रहे सामाजिक जिम्मेदारी

मुकेश अग्रवाल

समाज में नाम कमाने के लिए शोर मचाना जरूरी नहीं, कभी-कभी खामोशी से किया गया एक नेक काम भी हजार भाषणों पर भारी पड़ जाता है।”

पत्थलगांव। समाज में पहचान बनाने के कई रास्ते हैं। कुछ लोग बड़े-बड़े भाषणों से सुर्खियां बटोरते हैं, तो कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनके काम बिना किसी शोर-शराबे के खुद उनकी पहचान बन जाते हैं। पत्थलगांव के वरिष्ठ समाजसेवी मदनलाल अग्रवाल इसी दूसरी श्रेणी में आते हैं। मंदिरों में सहयोग से लेकर सामाजिक जरूरतों के लिए आगे आने और स्वर्गरथ जैसी उपयोगी सुविधा भेंट करने तक, उनका सेवाभाव लगातार चर्चा में रहा है। अग्रसेन जयंती के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। इस दौरान उनके योगदान और समाज के प्रति समर्पण की सराहना की गई।

अग्र समाज में मदनलाल अग्रवाल की पहचान ऐसे व्यक्ति के रूप में है, जो जरूरत के समय सहयोग के लिए आगे आने में पीछे नहीं हटते। उनके लिए समाजसेवा केवल मंच पर सम्मान पाने या तस्वीर खिंचवाने का अवसर नहीं, बल्कि लोगों की जरूरतों को समझकर यथासंभव मदद करने का माध्यम है। जरूरतमंदों की सहायता हो या धार्मिक-सामाजिक आयोजन में सहयोग की आवश्यकता, वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार योगदान देने के लिए तत्पर रहते हैं।

स्वर्गरथ की सौगात, दुख की घड़ी में समाज के काम आने की पहल

मदनलाल अग्रवाल ने हाल ही में हरियाणा-राजस्थान सामाजिक संगठन, पत्थलगांव को स्वर्गरथ भेंट किया। यह योगदान केवल एक वाहन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए उपयोगी व्यवस्था उपलब्ध कराने की पहल है, जिन्हें अपनों के निधन के बाद कठिन समय में इसकी जरूरत पड़ती है।

आमतौर पर सामाजिक जिम्मेदारियों की चर्चा करना आसान होता है, लेकिन जरूरत के समय काम आने वाली सुविधाएं जुटाना असली चुनौती होती है। मदनलाल अग्रवाल ने स्वर्गरथ भेंट कर इसी जिम्मेदारी को निभाने का प्रयास किया है। उनकी यह पहल समाज में सहयोग और परोपकार की भावना को मजबूत करने वाली है।

दस दिन तक पानी की बोतलें, छोटी जरूरतों में भी बड़ी सेवा

अग्रसेन जयंती के दस दिवसीय आयोजन में भी मदनलाल अग्रवाल ने अपनी ओर से पानी की बोतलें भेंट कर सहयोग दिया। पूरे आयोजन के दौरान लोगों की पेयजल संबंधी जरूरतों का ध्यान रखना उनकी इस पहल का उद्देश्य रहा।

समाजसेवा का अर्थ केवल लाखों रुपये खर्च करना या किसी बड़े निर्माण में योगदान देना ही नहीं है। कई बार आयोजन में शामिल लोगों को पानी उपलब्ध कराना जैसी छोटी दिखने वाली व्यवस्था भी बड़ी राहत बन जाती है। कहने को पानी की बोतलें मामूली चीज हैं, लेकिन सेवा का मूल्य बोतल की कीमत से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली सुविधा से तय होता है। यही सोच मदनलाल अग्रवाल के योगदान को खास बनाती है।

अग्रवाल सभा अध्यक्ष अनिल मित्तल ने की सराहना

अग्रसेन जयंती के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में अग्रवाल सभा के अध्यक्ष अनिल मित्तल ने भी मदनलाल अग्रवाल के सामाजिक योगदान की सराहना की। उन्होंने समाजहित में उनके निरंतर सहयोग, उदारता और सेवाभाव को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्व समाज की एकजुटता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।

समाज में ऐसे लोगों का योगदान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी पहल दूसरे लोगों को भी सामाजिक कार्यों में आगे आने की प्रेरणा देती है। जब कोई व्यक्ति जरूरत के समय समाज के साथ खड़ा होता है, तो उसका प्रभाव किसी एक आयोजन या अवसर तक सीमित नहीं रहता।

सम्मान की असली वजह मंच नहीं, समाज के लिए किए गए काम

अग्रसेन जयंती के मंच पर मदनलाल अग्रवाल का सम्मान उनके सामाजिक और धार्मिक कार्यों के प्रति समर्पण का सम्मान रहा। मंदिरों में सहयोग, जरूरतमंदों की मदद, स्वर्गरथ जैसी उपयोगी सुविधा की भेंट और दस दिवसीय आयोजन में निरंतर सहयोग उनके सेवाभावी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हैं।

विडंबना यह है कि समाज में कई बार सेवा से ज्यादा चर्चा दिखावे की होती है। ऐसे माहौल में मदनलाल अग्रवाल का योगदान यह संदेश देता है कि समाजसेवा की असली कसौटी भाषणों की लंबाई या प्रचार की चमक नहीं, बल्कि जरूरत के समय उठाया गया मदद का हाथ है।

उनकी पहल से मिलने वाला संदेश साफ है—सम्मान मांगने से नहीं, अपने काम से कमाया जाता है। समाज के सुख-दुख में सहभागी बनना, जरूरतमंदों की सहायता करना और उपयोगी सुविधाएं उपलब्ध कराना ही सेवा की वह परंपरा है, जो समाज को मजबूत बनाती है।

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