अग्रसेन जयंती पर पत्थलगांव में उमड़ा आस्था और उत्साह का सैलाब, भव्य शोभायात्रा में दिखी समाज की एकजुटता महाराजा अग्रसेन की झांकी, अग्रध्वज थामे युवाओं का हुजूम और पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने बांधा समां, जगह-जगह आरती और पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत नागपुर के ढोल-नगाड़ा दल की थाप पर झूम उठा शहर, तीन प्रमुख मार्गों से गुजरी शोभायात्रा में उमड़ा अग्रवाल समाज

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव। महाराजा अग्रसेन की जयंती पर पत्थलगांव की सड़कें शनिवार को भक्ति, उल्लास और सामाजिक एकजुटता के रंग में रंगी नजर आईं। कहीं अग्रध्वज थामे युवाओं का जोश दिखाई दिया, तो कहीं पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की टोली आकर्षण का केंद्र बनी। महाराजा अग्रसेन की भव्य झांकी, भक्तिमय गीतों की गूंज और नागपुर से आए ढोल-नगाड़ा दल की शानदार प्रस्तुति ने शोभायात्रा में ऐसा रंग जमाया कि पूरा शहर उत्सवमय हो उठा। जगह-जगह स्वागत द्वार, आरती, जलपान और आतिशबाजी के बीच निकली इस शोभायात्रा ने अग्रवाल समाज की परंपरा, आस्था और एकजुटता की जीवंत तस्वीर पेश की।

महाराजा अग्रसेन स्वर्ण जयंती महोत्सव के समापन अवसर पर शनिवार शाम करीब पांच बजे अग्रसेन भवन से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा की अगुवाई अग्रध्वज लेकर चल रहे युवाओं ने की। उनके पीछे महाराजा अग्रसेन की आकर्षक झांकी चल रही थी, जिसे भव्य रूप से सजाया गया था। झांकी में महाराजा अग्रसेन का विशाल चित्र श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान प्रसाद वितरण भी किया गया।

शोभायात्रा में समाज के वरिष्ठजनों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। उन्हें सुसज्जित वाहनों में बैठाकर सम्मानपूर्वक शामिल कराया गया। वहीं बच्चों से लेकर युवाओं तक में खासा उत्साह दिखाई दिया। पारंपरिक परिधानों में सजे समाज के लोग शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। महिलाओं की टोली ने हाथों में अग्रपताका थाम रखी थी। समाज के घर-घर से महिलाओं की भागीदारी ने आयोजन को पारिवारिक और सामूहिक उत्सव का स्वरूप दे दिया।

ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूम उठा शहर

इस बार शोभायात्रा में नागपुर से आए ढोल-नगाड़ा दल की प्रस्तुति खास आकर्षण रही। कलाकारों ने अपनी लयबद्ध थाप और अनूठी शैली से लोगों का मन मोह लिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ महाराजा अग्रसेन पर आधारित भक्तिगीत वातावरण में भक्ति का संचार करते रहे। उत्साह से लबरेज युवाओं ने आतिशबाजी कर जश्न को और रंगीन बना दिया।

शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती शोभायात्रा के स्वागत के लिए जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे। इंदिरा चौक को विशेष रूप से सजाया गया था। तीन प्रमुख मार्गों का भ्रमण करते हुए शोभायात्रा जब इंदिरा चौक पहुंची, तो वहां का उत्सवी माहौल देखते ही बन रहा था। इसके बाद शोभायात्रा वापस अग्रसेन भवन पहुंचकर संपन्न हुई।

कहीं आरती, कहीं जलपान; सामाजिक सौहार्द की दिखी मिसाल

महाराजा अग्रसेन की शोभायात्रा का शहर में विभिन्न स्थानों पर आत्मीय स्वागत किया गया। अंबिकापुर रोड पर अग्रवाल समाज के प्रमुखजनों ने स्वागत की व्यवस्था की, वहीं बस स्टैंड के समीप सिख समाज और हरियाणा पंचायती धर्मशाला के पास ब्राह्मण समाज सहित अन्य समाजों के लोगों ने भी स्वागत कर सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।

कई स्थानों पर महिलाओं ने महाराजा अग्रसेन की आरती उतारी और पूजा-अर्चना की। शोभायात्रा में शामिल लोगों को जलपान भी कराया गया। अलग-अलग समाजों की सहभागिता ने आयोजन को केवल अग्रवाल समाज का उत्सव ही नहीं, बल्कि शहर की साझा सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बना दिया।

सप्ताहभर प्रतियोगिताओं की धूम, बच्चों से बुजुर्गों तक ने दिखाया हुनर

महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर अग्रवाल समाज द्वारा करीब एक सप्ताह तक विविध सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोरंजक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन स्पर्धाओं में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा और हुनर का प्रदर्शन किया, जिसके बाद निर्णायक मंडल ने विजेताओं का चयन किया।

पूरे महोत्सव के दौरान समाज के लोगों में उत्साह बना रहा। शनिवार को निकली भव्य शोभायात्रा ने सप्ताहभर चले आयोजनों को यादगार समापन दिया। महाराजा अग्रसेन के आदर्शों के प्रति आस्था, परंपराओं के प्रति सम्मान और समाज की एकजुटता का संदेश देते हुए यह आयोजन पत्थलगांव में उत्सव की अमिट छाप छोड़ गया।

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