अंधेर नगरी, चौपट कार्रवाई! पत्थलगांव हॉस्टल कांड में ‘हटाओ और भूल जाओ’ का फॉर्मूला? अधीक्षक पर मेहरबानी, सहायक आयुक्त संजय सिंह की भूमिका पर उठे सवाल बच्चों के भविष्य से जुड़े गंभीर मामले में सिर्फ पद से हटाने की कार्रवाई पर उबाल, पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह भी जता चुके हैं सख्त कार्रवाई की जरूरत — अब कलेक्टर और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

 

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के  क्षेत्र पत्थलगांव में आदिवासी बालक छात्रावास से जुड़ा मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है। शासकीय प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में सामने आई चोरी की घटना और अधीक्षक की कथित लापरवाही को लेकर लोगों में नाराजगी है। मामले में हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी को पद से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या बच्चों की सुरक्षा और छात्रावास की व्यवस्था से जुड़े मामले में सिर्फ पद से हटाना ही पर्याप्त कार्रवाई है?

मामला कुछ ऐसा है कि सवालों की फाइल लंबी होती जा रही है, लेकिन कार्रवाई की धार कितनी तेज है, इसे लेकर असंतोष बना हुआ है। जनता का सवाल सीधा है—जब मामला आदिवासी बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़ा हो, तो जवाबदेही तय करने में इतनी नरमी क्यों?

‘हटाओ और मामला ठंडा होने दो’—क्या यही है कार्रवाई का फॉर्मूला?

हॉस्टल कांड के बाद अधीक्षक को हटाए जाने की कार्रवाई ने विवाद को शांत करने के बजाय नए सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जांच में गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो केवल पद से हटाने के बजाय तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। नियमों के अनुरूप विभागीय कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाने चाहिए।

व्यंग्यात्मक अंदाज में लोग पूछ रहे हैं—क्या प्रशासनिक व्यवस्था में गलती की कीमत सिर्फ कुर्सी बदलने तक सीमित रह गई है? यदि ऐसा है, तो जवाबदेही का हिसाब आखिर कौन करेगा?

पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह के सवाल, अब प्रशासन से जवाब की उम्मीद

इस मामले में पूर्व मंत्री रामपुकार सिंह भी पहले बच्चों के साथ किसी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किए जाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत की बात उठा चुके हैं। उनका रुख इस मुद्दे की गंभीरता को सामने लाता है।

अब स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि भी सख्त कार्रवाई की जरूरत जता चुके हैं, तो विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई की समीक्षा होनी चाहिए। सवाल यह नहीं कि किसी अधिकारी को एक पद से हटाया गया या नहीं, बल्कि यह है कि क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हुई, जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय हुई और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए ठोस कदम उठाए गए?

सहायक आयुक्त संजय सिंह की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

मामले को लेकर सहायक आयुक्त संजय सिंह की भूमिका और विभागीय कार्रवाई की पर्याप्तता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और बच्चों के परिजनों के बीच चर्चा है कि हॉस्टल अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी के साथ मंडल संयोजक मनीष पैकरा की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

हालांकि, दोनों की जिम्मेदारी और किसी संभावित चूक को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। फिलहाल प्रमुख सवाल यह है कि विभाग ने पूरे घटनाक्रम की जांच किस स्तर तक की है और क्या सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की गई है?

व्यंग्य का तीर यहीं आकर लगता है—अगर हर विवाद का समाधान सिर्फ पद बदलना है, तो जवाबदेही तय करने की जरूरत आखिर कब महसूस होगी?

मुख्यमंत्री के गृह जिले क्षेत्र में ही व्यवस्था की परीक्षा

पत्थलगांव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गृह जिला क्षेत्र है। ऐसे में यहां के आदिवासी छात्रावास से जुड़ा मामला प्रशासनिक संवेदनशीलता और निगरानी की परीक्षा बन गया है। छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि उन परिवारों के भरोसे का केंद्र है जो अपने बच्चों को पढ़ाई और बेहतर भविष्य की उम्मीद में वहां भेजते हैं।

ऐसे में यदि व्यवस्था में लापरवाही की शिकायत सामने आती है, तो उसे सामान्य विभागीय विवाद समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और देखरेख सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही यदि किसी मामले में कार्रवाई की पर्याप्तता पर सवाल उठने लगें, तो प्रशासन को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

जनता के सीधे सवाल—जवाब देगा कौन?

अब पत्थलगांव की जनता और बच्चों के परिजन कलेक्टर जशपुर तथा मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं—

हॉस्टल कांड की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए।

अधीक्षक सूर्यकांत निकेतकारी की भूमिका और कथित लापरवाही की जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।

मंडल संयोजक मनीष पैकरा की भूमिका की भी नियमानुसार जांच हो।

सहायक आयुक्त संजय सिंह से विभागीय कार्रवाई के आधार और जांच की स्थिति स्पष्ट करने को कहा जाए।

जांच में दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए तथा आपराधिक कृत्य के साक्ष्य मिलने पर कानून के अनुसार कदम उठाए जाएं।

छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

अब ‘फाइल बंद’ नहीं, जवाबदेही तय होने का इंतजार

पत्थलगांव हॉस्टल कांड ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि सरकारी छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है। केवल पद से हटाने की कार्रवाई से नाराजगी दूर होगी या नहीं, यह आने वाले विभागीय कदम तय करेंगे।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में केवल कार्रवाई की औपचारिकता तक सीमित रहता है या जांच के जरिए पूरी जिम्मेदारी तय कर जनता के सवालों का जवाब भी देता है। क्योंकि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामले में जनता को आश्वासन नहीं, पारदर्शी जांच और जवाबदेह कार्रवाई चाहिए।

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