छात्रावास में अधीक्षक गायब, आधी रात को 11 नाबालिगों का ‘मोबाइल मिशन’! लक्ष्मी मोबाइल चोरीकांड ने खोली छात्रावास की व्यवस्था की पोल, अधीक्षक पर निलंबन की मांग बच्चों के भविष्य की रखवाली कौन कर रहा था? छात्रावास में रहने वाले बच्चों पर लाखों के मोबाइल चोरी करने का आरोप, अब अधीक्षक की भूमिका पर उठे सवाल



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। जिस छात्रावास में आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर उनके सुनहरे भविष्य की नींव रखी जानी थी, वहां की व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनि मंदिर के सामने स्थित लक्ष्मी मोबाइल दुकान में हुई चोरी के मामले में छात्रावास में रहने वाले 11 नाबालिग बच्चों के नाम सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि बच्चों ने आधी रात को छात्रावास से निकलकर दुकान का ताला काटा, लाखों रुपये के मोबाइल पार किए और फिर छात्रावास के समीप मैदान में बैठकर चोरी के सामान का बंटवारा भी कर लिया। कुछ दिन बाद इसी इलाके की दूसरी मोबाइल दुकान में भी ताला तोड़ने का प्रयास किया गया।
मामले ने अब केवल चोरी की वारदात का रूप नहीं रखा, बल्कि छात्रावास की निगरानी व्यवस्था और अधीक्षक की कथित लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों के परिजनों ने अधीक्षक पर कठोर कार्रवाई की मांग की है, वहीं वरिष्ठ कांग्रेस विधायक रामपुकार सिंह ने अधीक्षक को निलंबित करने की मांग उठाई है।
आधी रात को ‘मोबाइल मिशन’, सुबह तक व्यवस्था बेखबर!
जानकारी के अनुसार, 10 सितंबर 2026 की रात करीब 12 से 2 बजे के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनि मंदिर के सामने स्थित लक्ष्मी मोबाइल दुकान का ताला आरी से काटकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया था। दुकान संचालक की शिकायत पर पत्थलगांव पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। इसी दौरान आसपास की एक अन्य मोबाइल दुकान में ताला तोड़ने की कोशिश हुई। इस घटना का फुटेज भी पुलिस को सौंपा गया। जांच के दौरान चोरी गए मोबाइल को चालू किए जाने पर पुलिस को तकनीकी सुराग मिला और संदेह की कड़ियां छात्रावास में रहने वाले नाबालिग बच्चों तक पहुंचीं।
पुलिस ने बच्चों से चोरी के मोबाइल बरामद किए हैं और मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है। हालांकि, बच्चों की संलिप्तता सामने आने के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि रात के वक्त छात्रावास की निगरानी आखिर किसके जिम्मे थी?
अधीक्षक के कमरे में आराम, बच्चे बाहर किसके भरोसे?
छात्रावास में पदस्थ एक कर्मचारी के हवाले से आरोप लगाया गया है कि अधीक्षक रात में छात्रावास में निवास नहीं करते और अपने घर से आना-जाना करते हैं। कर्मचारी के अनुसार, छात्रावास के छोटे कर्मचारी भोजन आदि की व्यवस्था करने के बाद वहीं रहते हैं, जबकि अधीक्षक की रात में मौजूदगी नियमित नहीं रहती।
यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि छात्रावास की निगरानी व्यवस्था में गंभीर चूक का संकेत होगा। आखिर जिन बच्चों को अभिभावक भरोसे के साथ छात्रावास में छोड़ते हैं, उनकी रात की निगरानी कौन कर रहा था? क्या छात्रावास की जिम्मेदारी केवल हाजिरी, भोजन और सरकारी कागजों तक सीमित रह गई थी?
व्यंग्यात्मक सवाल यही है—बच्चे पढ़ाई के लिए छात्रावास में रह रहे थे या रात में बाहर निकलने की आजादी के साथ अपनी अलग ही ‘योजना’ बना रहे थे? हालांकि, अधीक्षक की वास्तविक जिम्मेदारी और लापरवाही का निर्धारण जांच के बाद ही होगा।
एक बार चोरी, फिर दोबारा कोशिश—निगरानी व्यवस्था पर सवाल
मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, बच्चों ने कथित तौर पर एक बार चोरी करने के बाद भी सबक नहीं लिया और कुछ दिन बाद दूसरी मोबाइल दुकान का ताला तोड़ने का प्रयास किया। इस बार वे सफल नहीं हो सके।
यदि छात्रावास से रात में बच्चों का बाहर निकलना और वापस आना नियमित निगरानी के बिना संभव हो रहा था, तो यह व्यवस्था की गंभीर कमजोरी मानी जाएगी। सवाल यह भी है कि छात्रावास प्रबंधन को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई और बच्चों को समय रहते अनुशासन एवं सही दिशा देने के लिए क्या कदम उठाए गए?

विधायक रामपुकार सिंह बोले—अधीक्षक पर हो निलंबन की कार्रवाई
पत्थलगांव के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक रामपुकार सिंह ने मामले पर कहा कि सबसे पहले दोषी छात्रावास अधीक्षक के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे कलेक्टर से चर्चा करेंगे।
विधायक की इस मांग के बाद मामले ने प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता हासिल कर ली है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर है।
सहायक आयुक्त ने भी मानी प्रथमदृष्टया गलती
सहायक आयुक्त संजय सिंह ने बताया कि उनके द्वारा छात्रावास का दौरा किया गया है। अधीक्षक के रात में छात्रावास में नहीं रहने के मामले पर कलेक्टर से चर्चा के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रथमदृष्टया अधीक्षक की गलती दिखाई देती है।
वहीं, पत्थलगांव एसडीएम क्षितिज गुरुभेले ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। वे उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देंगे और जो भी लापरवाही सामने आएगी, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों का आक्रोश—पढ़ने भेजा था, चोरी के आरोप तक कैसे पहुंचे बच्चे?
छात्रावास पहुंचे बच्चों के परिजनों ने अधीक्षक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए छात्रावास में रखा था। यदि निगरानी और अनुशासन की व्यवस्था ठीक होती, तो बच्चों के इस तरह के मामले में फंसने की नौबत क्यों आती?
परिजनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय की जाए। साथ ही बच्चों की पढ़ाई, काउंसलिंग और भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएं।
अब जांच की बारी, कार्रवाई होगी या फाइलों में दफन होगा मामला?
लक्ष्मी मोबाइल चोरीकांड ने छात्रावास की सुरक्षा, बच्चों की निगरानी और अधीक्षक की जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पुलिस चोरी के मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी ओर प्रशासन के सामने छात्रावास की व्यवस्था की जांच और जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन केवल जांच और चर्चा तक सीमित रहता है या छात्रावास की व्यवस्था में कथित लापरवाही पर ठोस कदम भी उठाता है। बच्चों से जवाबदेही तय करना जरूरी है, लेकिन उनके भविष्य की जिम्मेदारी संभालने वाले तंत्र की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। आखिर छात्रावास का उद्देश्य बच्चों को सही राह दिखाना है—न कि ऐसी परिस्थितियां बनने देना, जिनमें उनका भविष्य सवालों के घेरे में आ जाए।
नोट: पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है। अधीक्षक के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा अंतिम जिम्मेदारी तय होना अभी शेष है।