147 करोड़ की सड़क, लेकिन नंदनझरिया में गड्ढों का साम्राज्य! ठेकेदार सुस्त, विभाग मस्त और जनता त्रस्त

अफसरों को नागरिकों का न्योता—AC दफ्तर छोड़िए, नंदनझरिया के गड्ढों का दर्शन कीजिए!

सरकार ने खोला 147 करोड़ का खजाना, नंदनझरिया ने खोल दिए गपत्थलगांव।

सरकार सड़क के लिए 147 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन नंदनझरिया पुल पर पहुंचते ही लगता है कि विकास की रफ्तार ने शायद ब्रेक लगा लिया है! पत्थलगांव से खरसिया तक करीब 105 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना निर्माणाधीन है, मगर नंदनझरिया पुल और उसके आसपास करीब 500 मीटर का हिस्सा इन दिनों वाहन चालकों के लिए सड़क कम और गड्ढों का चुनौतीपूर्ण ट्रैक ज्यादा नजर आ रहा है।

बड़े-बड़े गड्ढों के बीच वाहन चालक अपनी मंजिल की ओर नहीं, बल्कि पहले यह सोचते हुए आगे बढ़ते हैं कि अगला पहिया गड्ढे में जाएगा या गाड़ी ही गड्ढे में समा जाएगी! बड़े वाहनों के फंसते ही जाम लगना यहां आम बात हो गई है। वाहन रेंगते हैं, लोग परेशान होते हैं और विभागीय व्यवस्था शायद अपनी सामान्य गति से चल रही है।

 सड़क पर गड्ढे या गड्ढों में सड़क?

नंदनझरिया पुल के ऊपर और दोनों ओर सड़क की हालत ऐसी है कि वाहन चालकों को मजबूरी में बेहद धीमी रफ्तार से गुजरना पड़ता है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है।

कुछ दिन पहले इसी बदहाल मार्ग पर एक ट्रैक्टर गड्ढे में अनियंत्रित होकर पलट गया। गनीमत रही कि चालक सुरक्षित बच गया। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह रास्ता और भी जोखिम भरा बना हुआ है।

सवाल यह है कि 147 करोड़ की सड़क परियोजना में गड्ढे भरने के लिए आखिर कितने करोड़ और चाहिए?

 ठेकेदार की सुस्ती या विभाग की ‘निगरानी नीति’?

सड़क निर्माण में देरी और मौजूदा बदहाली को लेकर ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन उससे बड़ा सवाल विभागीय निगरानी को लेकर है।

करोड़ों रुपये की परियोजना में ठेकेदार की गतिविधियों पर नजर रखना, गुणवत्तापूर्ण काम कराना और लापरवाही की स्थिति में कार्रवाई करना आखिर किसकी जिम्मेदारी है?

जनता का सवाल सीधा है—अगर ठेकेदार काम नहीं कर रहा तो विभाग क्या कर रहा है?

नंदनझरिया पुल को लेकर पत्थलगांव और धरमजयगढ़ लोक निर्माण विभाग के बीच क्षेत्राधिकार की चर्चा भी सामने आ रही है। जनता के लिए हालांकि यह समझना मुश्किल है कि पुल किसके क्षेत्र में आता है। उनके लिए तो सड़क एक ही है और परेशानी भी एक ही—गड्ढे, जाम और हादसे का खतरा।

 सरकार पैसा दे रही, सड़क फिर भी ‘जुगाड़’ के भरोसे?

एक ओर प्रदेश सरकार बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर नंदनझरिया पुल का यह हिस्सा सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।

नागरिकों का कहना है कि बारिश के दिनों में सड़क को तत्काल समतल कर गड्ढों को भरना बेहद जरूरी है। लेकिन मौके के हालात देखकर ऐसा लगता है कि सड़क की मरम्मत से ज्यादा जरूरी शायद फाइलों में उसकी निगरानी करना समझ लिया गया है।

 नागरिकों ने अधिकारियों को दिया ‘VIP न्योता’—दफ्तर छोड़िए, पुल पर आइए!

सड़क की बदहाली से परेशान नागरिकों ने अब लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को बाकायदा नंदनझरिया पुल पर आने का न्योता दिया है।

समाजसेवी बबलू तिवारी ने कहा कि अधिकारियों को कागजों और दफ्तरों से बाहर निकलकर एक बार मौके पर आना चाहिए और देखना चाहिए कि आम नागरिक किस तरह गड्ढों और जाम के बीच सफर करने को मजबूर हैं।

नागरिकों का कहना है कि यदि अधिकारी एक बार मौके पर आकर सड़क की वास्तविक स्थिति देख लें तो शायद उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि फाइल में सड़क और जमीन पर सड़क में कितना फर्क है।

 अधिकारी का जवाब आया, उपयंत्री का फोन नहीं उठा

इस मामले में धरमजयगढ़ लोक निर्माण विभाग की एसडीओ मंजू पटेल ने बताया कि नंदनझरिया पुल का कार्य श्री जी कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने अधिक जानकारी के लिए उपयंत्री गौरव शर्मा से संपर्क करने की बात कही।

उपयंत्री गौरव शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

अब सवाल यही है कि 147 करोड़ की सड़क परियोजना में जनता को कब मिलेगी गड्ढों से राहत?

कब ठेकेदार की सुस्ती पर कार्रवाई होगी?

और कब विभागीय अधिकारी कागजों से निकलकर नंदनझरिया पुल की जमीन पर उतरेंगे?

फिलहाल जनता जाम में फंसी है, वाहन गड्ढों में फंसे हैं और करोड़ों की सड़क परियोजना अपनी ‘धीमी रफ्तार’ से आगे बढ़ रही है।ड्ढों के खाते!

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