बड़ा हादसा टला: खरकट्टा सरकारी अस्पताल की छत से गिरी सीलिंग, दहशत में मरीज और स्वास्थ्यकर्मी! जर्जर अस्पताल बना मौत का साया, कब गिर जाए छत कोई भरोसा नहीं

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव/खरकट्टा। जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम खरकट्टा के सरकारी अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह तस्वीर सामने आई है। वर्षों से जर्जर हालत में खड़े अस्पताल भवन की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि घटना के समय मौजूद मरीज, बच्चे और स्वास्थ्यकर्मी बाल-बाल बच गए, अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अस्पताल में इलाज का कार्य चल रहा था, तभी अचानक तेज आवाज के साथ सीलिंग का प्लास्टर टूटकर नीचे आ गिरा। अचानक हुई इस घटना से अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। मरीज और उनके परिजन घबराकर बाहर की ओर भागने लगे। कुछ देर के लिए पूरे अस्पताल परिसर में दहशत का माहौल बन गया।

“डर के साये में ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्यकर्मी”

घटना की सूचना मिलते ही ग्राम पंचायत खरकट्टा के सरपंच यीशु दास किण्डो मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें बताया कि भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि हर समय छत या प्लास्टर गिरने का डर बना रहता है।

स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि वे रोजाना जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं। कब किसके ऊपर छत का हिस्सा गिर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले—क्या प्रशासन किसी जान जाने का इंतजार कर रहा है?

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अस्पताल भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों के अनुसार अस्पताल की छतें जगह-जगह से टपक रही हैं, दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और भवन पूरी तरह खस्ताहाल हो चुका है। इसके बावजूद मरीजों का इलाज इसी भवन में किया जा रहा है।

अगर मलबा मरीजों पर गिरता तो कौन होता जिम्मेदार?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सीलिंग का यह भारी हिस्सा किसी मरीज, गर्भवती महिला, बच्चे या स्वास्थ्यकर्मी पर गिर जाता तो गंभीर जनहानि हो सकती थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेता?

ग्रामीणों की चेतावनी

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द अस्पताल भवन की मरम्मत नहीं कराई गई या नया भवन स्वीकृत नहीं किया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर मरीजों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग

एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर खरकट्टा का यह अस्पताल उन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि यह घटना प्रशासन को जगाने के लिए पर्याप्त साबित होती है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों

की नींद खुलेगी।

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