पत्थलगांव में गूंजा ‘करें योग, रहें निरोग’ का संदेश, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पतंजलि योग समिति लोगों ने किया योगाभ्यास



पत्थलगांव। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शनिवार सुबह पत्थलगांव में स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। पतंजलि योग समिति पत्थलगांव के तत्वावधान में वर्षों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नगर के मैरिज गार्डन प्रांगण में योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योग साधकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर योग एवं प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।
सुबह की ताजगी भरी हवा के बीच जब योग साधकों ने एक साथ विभिन्न योगासन और प्राणायाम किए तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से सराबोर हो उठा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की कला बताया।
योग से तन-मन दोनों रहते हैं स्वस्थ : पवन अग्रवाल
योग प्रशिक्षक पवन अग्रवाल ने उपस्थित योग साधकों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि योग और प्राणायाम को सांसों की गति के साथ विधिवत करना चाहिए। जल्दबाजी में किया गया योग अपेक्षित लाभ नहीं देता, जबकि सही तरीके से नियमित अभ्यास करने पर शरीर निरोगी और मन शांत रहता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान भागदौड़ भरे जीवन में तनाव, अवसाद और विभिन्न बीमारियों से बचने के लिए योग सबसे प्रभावी माध्यम है। योग व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है।
नियमित योग अपनाने का दिया संदेश
पतंजलि योग समिति के सक्रिय सदस्य मुकेश अग्रवाल ने कहा कि योग और प्राणायाम करते समय मन को एकाग्र रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योग को धीरे-धीरे, संयम और सही श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया के साथ करना चाहिए। योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए।
उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे “करें योग, रहें निरोग” के संदेश को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और परिवार तथा समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें।


योगा में बलदेव नायक, सुंदरलाल गर्ग, खजांची जिंदल, संतोष गुप्ता, मनोज तिवारी, जितेंद्र अग्रवाल, नीरज अग्रवाल सहित दर्जनों योग साधक एवं योग प्रेमी उपस्थित रहे।
स्वस्थ भारत की दिशा में एक सार्थक पहल
पतंजलि योग समिति द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और योग को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी बना। योग साधकों ने संकल्प लिया कि वे नियमित योगाभ्यास कर स्वयं स्वस्थ रहेंगे और दूसरों को भी योग अपनाने के लिए प्रेरित करें।