एनएच-43 पर फिर पलटा ट्रक, घर के लोग बाल-बाल बचे; सड़क नहीं, हादसों का खुला निमंत्रण!

मुकेश अग्रवाल

 

पत्थलगांव।

पत्थलगांव-जशपुर मार्ग स्थित ठाकुर शोभा सिंह कॉलेज के पास मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित घर के पास पलट गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त घर में मौजूद लोग इसकी चपेट में नहीं आए और एक बड़ा हादसा टल गया।

 

हादसे ने एक बार फिर एनएच-43 की बदहाल व्यवस्था और सड़क निर्माण की कथित लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। सड़क पर डिवाइडर तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन कई जगह डिवाइडर के लिए पर्याप्त संकेतक तक नजर नहीं आते। ऐसे में वाहन चालकों के लिए यह डिवाइडर सुविधा कम और अचानक सामने आने वाली मुसीबत ज्यादा साबित हो रहे हैं।

 

सड़क बनी नहीं, गड्ढों ने पहले ही कब्जा जमा लिया!

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच-43 की हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। जगह-जगह सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालक सड़क पर चल रहे हैं या गड्ढों के बीच रास्ता तलाश रहे हैं, यह समझना मुश्किल हो गया है। सड़क निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है, यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।

 

व्यंग्यात्मक अंदाज में कहें तो एनएच-43 पर सड़क कम और गड्ढे ज्यादा दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है जैसे सड़क ने भी अपनी पहचान छोड़कर गड्ढों को ही अपना स्थायी पता बना लिया हो।

 

अंबिकापुर रोड पर टूटे डिवाइडर भी दे रहे ‘खुली छूट’

 

यही हाल अंबिकापुर रोड एनएच-43 का भी है। यहां डिवाइडर तो बना दिए गए, लेकिन जगह-जगह टूटे डिवाइडर अब व्यवस्था की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। लोगों ने कई स्थानों पर डिवाइडर काटकर आने-जाने के रास्ते बना लिए हैं और टूटे हिस्सों की मरम्मत की ओर जिम्मेदारों का ध्यान अब तक नहीं गया है।

 

स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि डिवाइडर बनाने के बाद विभाग ने शायद यह मान लिया कि अब उसकी देखभाल की जरूरत ही नहीं! यदि समय रहते इन टूटे डिवाइडरों की मरम्मत और अवैध कट को बंद नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में सड़क पर डिवाइडर तलाशना भी मुश्किल हो सकता है।

 

हर हादसे के बाद वही सवाल—जिम्मेदार कौन?

 

एनएच-43 पर लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं और सड़क की बदहाली के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन गड्ढों और बदहाल यातायात व्यवस्था के कारण होने वाले हादसों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

 

क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? या फिर जिम्मेदार विभाग हादसे के बाद जागने की परंपरा को ही अपनी कार्यशैली मान चुका है?

 

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि एनएच-43 की तत्काल मरम्मत कराई जाए, डिवाइडरों पर पर्याप्त संकेतक लगाए जाएं, टूटे डिवाइडरों को दुरुस्त किया जाए और सड़क की नियमित निगरानी एवं रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि ‘हादसे के बाद कार्रवाई’ के बजाय ‘हादसे से पहले सावधानी’ की व्यवस्था जमीन पर दिखाई दे।

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