रायगढ़ रोड पर मौत का सफर! बाईपास के इंतजार में शहर की सड़कें बन रहीं हादसों का अड्डा जोगपाल स्कूल के सामने ट्रक ने स्कूटी सवार युवक को कुचला, मौके पर मौत — बाईपास सड़क नहीं बनने से भारी वाहनों के शहर में धड़ल्ले से दौड़ रहे



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। पत्थलगांव थाना क्षेत्र के जोगपाल स्कूल के गेट के सामने स्टेट हाईवे पर रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक बार फिर शहर की यातायात व्यवस्था और बहुप्रतीक्षित बाईपास सड़क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायगढ़ की ओर से आ रहे एक ट्रक चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए सामने से आ रही स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि स्कूटी सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक विपिन किशोर कुजूर, ग्राम बोड़ीकुटेन, थाना लैलूंगा का रहने वाला था और अपनी स्कूटी क्रमांक CG13AB9976 से 23 अगस्त को पत्थलगांव अपने काम से आया था। शाम करीब 6 से 6:30 बजे वह घर लौट रहा था। इसी दौरान जोगपाल स्कूल के सामने रायगढ़ की ओर से आ रहे आयशर ट्रक क्रमांक AP39TQ2709 के चालक ने तेज एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए स्कूटी को सामने से टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पत्थलगांव पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रक चालक को हिरासत में लेकर थाने ले गई। मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। ट्रक चालक की पहचान नरसू सावंत, पिता लक्ष्मण सावंत, निवासी कन्हेरी, जिला सोलापुर, महाराष्ट्र के रूप में हुई है।
बाईपास सड़क: करोड़ों का मुआवजा बंटा, फिर भी सड़क गायब! आखिर किसकी जवाबदेही?
पत्थलगांव की बहुप्रतीक्षित बाईपास सड़क का मुद्दा अब महज सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और जिंदगी का सवाल बन चुका है। वर्षों से बाईपास की मांग उठती रही है, लेकिन निर्माण की तस्वीर आज भी साफ नहीं हो पाई है। दूसरी ओर बाईपास के अभाव में रायगढ़ रोड समेत शहर की प्रमुख सड़कों पर भारी वाहनों और चारपहिया वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बाईपास के लिए जमीन मालिकों को करोड़ों रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है, तो आखिर बाईपास सड़क जमीन पर कब उतरेगी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जमीन मालिक मुआवजा प्राप्त करने के बाद भी अपनी जमीनों का उपयोग खेती के लिए कर रहे हैं, जबकि जिस सड़क के लिए मुआवजा दिया गया, उसका निर्माण अब तक अधूरा है। ऐसे में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बाईपास नहीं तो शहर में भारी वाहन क्यों?
पत्थलगांव शहर के बीच से होकर गुजरने वाले रायगढ़ मार्ग पर दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। शहर की आबादी और यातायात बढ़ने के साथ यह मार्ग आम लोगों के लिए लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि बाईपास सड़क समय पर बन जाती, तो भारी वाहनों का बड़ा हिस्सा शहर के बाहर से निकल सकता था और शहर के भीतर होने वाले हादसों का खतरा काफी कम किया जा सकता था।
रायगढ़ रोड पर हाल के दिनों में लगातार हो रहे हादसों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। कुछ दिन पहले भी सड़क हादसे में एक बैंककर्मी की मौत की घटना सामने आई थी। अब एक और युवक की जान चली गई। हादसों का यह सिलसिला आखिर कब रुकेगा और जिम्मेदार कब जागेंगे?
तेज रफ्तार या व्यवस्था की नाकामी?
हर हादसे के बाद तेज रफ्तार और वाहन चालक की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराकर मामला खत्म कर दिया जाता है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ चालक की लापरवाही से ही हादसे हो रहे हैं? जब शहर के बीच से भारी वाहन गुजरने को मजबूर हैं और वर्षों से प्रस्तावित बाईपास सड़क अब तक नहीं बन पाई है, तो क्या सड़क व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की भी जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए?
स्थानीय लोगों की मांग है कि बाईपास सड़क निर्माण को लेकर शासन-प्रशासन स्पष्ट समयसीमा तय करे और वर्षों से लंबित इस परियोजना को जल्द पूरा किया जाए, ताकि शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम हो और आम नागरिकों की जिंदगी सुरक्षित हो सके।
अब सवाल सिर्फ बाईपास का नहीं है—सवाल यह है कि अगली जान जाने से पहले आखिर व्यवस्था कब जागेगी?