पिकअप पलटी तो खुली मवेशी तस्करी की पोल! भारतमाला सड़क बनी तस्करों का नया ‘शॉर्टकट’ मवेशियों से ठूंस-ठूंसकर भरी पिकअप निर्माणाधीन सड़क पर पलटी, तस्कर वाहन छोड़कर फरार — दो पशुओं की मौत; शशि मोहन सिंह के जाते ही फिर ‘सक्रिय’ होने के आरोप



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। कभी पुलिस की सख्ती से सहमे नजर आने वाले कथित मवेशी तस्करों के हौसले एक बार फिर बुलंद होते दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे कि तस्करी के लिए अब रास्ते भी ‘हाईटेक’ चुने जा रहे हैं और निर्माणाधीन भारतमाला सड़क को कथित तौर पर नया शॉर्टकट बनाया जा रहा है। लेकिन इस बार तस्करों की रफ्तार को पुलिस ने नहीं, बल्कि सड़क किनारे पलटी पिकअप ने ब्रेक लगा दिया।
निर्माणाधीन भारतमाला सड़क पर मवेशियों से भरी एक पिकअप अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुटी तो पिकअप में सवार लोग वाहन छोड़कर फरार हो गए। वाहन की जांच में कथित तौर पर मवेशियों को बेहद संकरे स्थान में ठूंस-ठूंसकर भरे जाने की बात सामने आई। इस घटना में दो पशुओं की मौत होने की जानकारी है।
पिकअप पलटी, तस्करों का ‘प्लान’ भी पलटा!
मामले ने एक बार फिर क्षेत्र में चल रही कथित मवेशी तस्करी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि सुनसान और निर्माणाधीन मार्गों का इस्तेमाल कर तस्करी को अंजाम देने की कोशिश की जा रही है। हादसा नहीं होता तो शायद यह पिकअप भी अपनी मंजिल की ओर निकल जाती और किसी को भनक तक नहीं लगती।
अब सवाल यह है कि क्या निर्माणाधीन भारतमाला सड़क तस्करों के लिए नया ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बन गई है? आखिर रात के अंधेरे में मवेशियों से भरी गाड़ियां इन रास्तों पर कैसे दौड़ रही हैं और जिम्मेदार तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही?
‘ऑपरेशन शंखनाद’ की गूंज थमी तो क्या तस्करों की बांसुरी फिर बजने लगी?
पूर्व पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के कार्यकाल में मवेशी तस्करी के खिलाफ चलाए गए अभियान ‘ऑपरेशन शंखनाद’ के दौरान पुलिस कार्रवाई की खूब चर्चा हुई थी। पुलिस द्वारा मवेशी तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों पर कार्रवाई और बड़ी संख्या में पशुओं को मुक्त कराने के मामले सामने आए थे।
उस दौर में तस्करी के नेटवर्क पर पुलिस की सख्ती का असर दिखाई देने की बात कही जाती थी। लेकिन अब उनके स्थानांतरण के बाद क्षेत्र में फिर से कथित तस्करी बढ़ने के आरोप लग रहे हैं।
व्यंग्यात्मक सवाल यही है कि क्या तस्करों की ‘घड़ी’ भी कप्तान बदलते ही रीसेट हो जाती है? कप्तान बदले और कथित तस्करों का आत्मविश्वास फिर लौट आया—यह महज संयोग है या व्यवस्था में कहीं कोई छेद है?
चरखापारा बाजार की ‘कहानी’ भी फिर चर्चा में
रायगढ़ जिले का चरखापारा मवेशी बाजार भी मवेशी तस्करी के खिलाफ सख्ती के दौरान चर्चा में रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि कार्रवाई के चलते वहां की गतिविधियां काफी कमजोर पड़ गई थीं। अब आरोप है कि तस्करी का नेटवर्क फिर सिर उठाने लगा है।
जशपुर जिले में समय-समय पर पुलिस द्वारा कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन सवाल यह है कि इक्का-दुक्का कार्रवाई से तस्करी के पूरे नेटवर्क पर लगाम कैसे लगेगी?
अब पिकअप ही नहीं, पैदल रास्ते भी ‘व्यस्त’!
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि मवेशियों को पैदल रास्तों से ले जाने का सिलसिला भी बढ़ा है। यदि यह आरोप सही है तो यह पुलिस और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है।
हालांकि, किसी व्यक्ति द्वारा नाम न छापने की शर्त पर कथित तौर पर यह दावा किया गया कि अब पहले की तरह तस्करी की जा रही है और पुलिस का भय कम हुआ है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन पिकअप पलटने की घटना ने जरूर कई सवालों को जन्म दे दिया है।
अब देखना है—‘शंखनाद’ फिर होगा या तस्करों की ही बजेगी बांसुरी?
पिकअप का पलटना महज एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि मवेशी तस्करी के कथित नेटवर्क पर सवाल खड़ा करने वाली घटना बन गया है। पुलिस प्रशासन के सामने चुनौती है कि निर्माणाधीन सड़कों, जंगल-पहाड़ी रास्तों और वैकल्पिक मार्गों पर निगरानी बढ़ाकर तस्करी के नेटवर्क को जड़ से पकड़ा जाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक पलटी हुई पिकअप का नहीं है—सवाल यह है कि क्या तस्करों के लिए कानून का डर फिर कमजोर पड़ रहा है?
अब निगाहें जशपुर पुलिस प्रशासन पर हैं। देखना होगा कि ‘ऑपरेशन शंखनाद’ जैसी सख्ती की आवाज फिर सुनाई देती है या फिर तस्करों की गाड़ियों का ‘बेखौफ सफर’ यूं ही जारी रहता है।