लाखों की हाईमास्ट लाइट अंधेरे में गुम! ‘रोशनी’ का सपना बना शोपीस, जिम्मेदारों की नींद अब भी नहीं टूटी
सौर ऊर्जा से जगमगाने का दावा, हकीकत में अंधेरे का साम्राज्य… पुलिस थाना के सामने दुर्गा चौक की हाईमास्ट लाइट खुद ही रोशनी को तरस रही।



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव।
अंधेरे को उजाले में बदलने के लिए लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई सौर ऊर्जा चालित हाईमास्ट लाइटें आज खुद बदहाली का शिकार होकर शोपीस बन चुकी हैं। रखरखाव के अभाव और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता ने इन महत्वाकांक्षी योजनाओं की चमक फीकी कर दी है। नगर के कई स्थानों पर स्थापित हाईमास्ट लाइटें वर्षों से बंद पड़ी हैं और अब सिर्फ सरकारी लापरवाही की मूक गवाह बनकर खड़ी हैं।
नगर के हृदय स्थल पुलिस थाना के सामने स्थित मां दुर्गा चौक पर लगी हाईमास्ट लाइट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कभी शाम ढलते ही जिसकी रोशनी से पूरा चौक जगमगा उठता था, आज वही हाईमास्ट लाइट अपनी आखिरी सांसें गिनती नजर आ रही है। शुरुआती दिनों में कुछ समय तक रोशनी बिखेरने वाली यह लाइट अब पूरी तरह बंद पड़ी है, जिससे आसपास का इलाका अंधेरे में डूबा रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से लगाए गए इन हाईमास्ट लाइटों का समय-समय पर रखरखाव नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि मामूली खराबियां भी बड़ी समस्या बन गईं और पूरी व्यवस्था ठप हो गई। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कागजों में योजनाओं को सफल बताने में व्यस्त हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
नगरवासियों का तंज है कि “एसी कमरों में बैठकर फाइलों में तो हाईमास्ट लाइटें आज भी चमचमा रही हैं, लेकिन सड़कों पर अंधेरा ही अंधेरा पसरा है।” लोग पूछ रहे हैं कि जब लाखों रुपये जनता की सुविधा के लिए खर्च किए गए थे, तो उनकी देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इन बंद पड़ी हाईमास्ट लाइटों में फिर से रोशनी लौटाएगा, या फिर लाखों रुपये की यह सरकारी योजना यूं ही जंग खाकर जनता को मुंह चिढ़ाती रहेगी? नगरवासी अब जवाब के साथ-साथ उजाले का भी इंतजार कर रहे हैं।