“कांग्रेस का चेहरा बदला, नियत नहीं” : गोमती साय ने आपातकाल को बताया भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय



“मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। देश में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “कांग्रेसियों का चेहरा भले बदल गया हो, लेकिन उनकी नियत आज भी नहीं बदली है। लोकतंत्र पर हमला करने वाले उस काले दौर को देश कभी नहीं भूल सकता।”
विधायक गोमती साय ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जिसे हमेशा याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास को भुलाकर वर्तमान और भविष्य का निर्माण नहीं किया जा सकता। उस दौर में आजाद भारत के नागरिक भय और दहशत के माहौल में जीने को मजबूर थे। प्रदेश और जशपुर जिले के भी कई लोगों को बिना किसी अपराध के जेलों में ठूंस दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों का गला घोंट दिया था। प्रेस की स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा प्रहार करते हुए कई मीडिया संस्थानों को बंद कर दिया गया, पत्रकारों को जेल भेजा गया और अनेक पत्रकारों को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि “मीडिया पर हुआ यह दमन आज भी लोकतंत्र के लिए एक चेतावनी है और इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
गोमती साय ने कहा कि एक परिवार विशेष के हाथों में सत्ता बनाए रखने की मानसिकता के कारण देश में आपातकाल जैसा अलोकतांत्रिक कदम उठाया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि धर्म के आधार पर देश का विभाजन होने के बावजूद भारत को सेक्युलरिज्म की आड़ में किस दिशा में ले जाने का प्रयास किया गया, इस पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा हर वर्ष आपातकाल को याद करती है ताकि नई पीढ़ी लोकतंत्र पर हुए उस हमले को समझ सके और भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों। “आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार था,” उन्होंने कहा।
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष सुनील गुप्ता, जिला महामंत्री मनीष अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, आलोक सारथी, हरजीत सिंह भाटिया, अंकित बंसल एवं हेमंत बंजारा सहित भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।