मनरेगा के कार्यों में भी कथित कमीशनखोरी! जनपद पंचायत पत्थलगांव में सीईओ और पीईओ की मिलीभगत के आरोप बिना कमीशन भुगतान की फाइलें आगे नहीं बढ़ने की शिकायत, मनरेगा कार्यों में अग्रिम कमीशन मांगने का आरोप; पंचायत प्रतिनिधियों में बढ़ रहा आक्रोश

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव। जनपद पंचायत पत्थलगांव में कथित कमीशनखोरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) संजय चंद्रा की कार्यशैली पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, वहीं अब मनरेगा के कार्यों में भी कथित रूप से अग्रिम कमीशन की मांग किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि सीईओ और पंचायत रोजगार अधिकारी (पीईओ) की मिलीभगत से मनरेगा के कार्यों में कमीशन का दबाव बनाया जा रहा है।

 

पंचायत प्रतिनिधियों के बीच यह शिकायत सामने आ रही है कि जनपद कार्यालय में भुगतान से संबंधित फाइलें तब तक आगे नहीं बढ़तीं, जब तक कथित कमीशन नहीं मिल जाता। वहीं मनरेगा के कार्यों में भी अग्रिम कमीशन की मांग किए जाने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

मनरेगा के कार्यों में अग्रिम कमीशन की मांग?

 

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और आधारभूत सुविधाओं के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों में विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्य कराए जाते हैं।

 

आरोप है कि जनपद पंचायत पत्थलगांव में मनरेगा के कार्यों को लेकर भी कथित कमीशनखोरी का दबाव बनाया जा रहा है। कार्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और भुगतान से संबंधित मामलों में अग्रिम कमीशन की मांग किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

 

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

 

भुगतान की फाइलें लंबित, पंचायत प्रतिनिधि परेशान

 

जनपद पंचायत कार्यालय में भुगतान की फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने को लेकर भी असंतोष व्याप्त है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि कार्य पूर्ण होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद भुगतान संबंधी फाइलों का निपटारा समय पर नहीं किया जा रहा है।

 

कथित तौर पर कमीशन नहीं मिलने तक फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जाता। इससे पंचायतों के विकास कार्यों और निर्माण कार्यों से जुड़े भुगतान प्रभावित होने की आशंका है।

 

सवाल यह है कि यदि सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रियाएं पूरी हैं, तो भुगतान की फाइलों को लंबित रखने का औचित्य क्या है?

 

सीईओ और पीईओ की भूमिका पर सवाल

 

जनपद पंचायत पत्थलगांव के सीईओ संजय चंद्रा और संबंधित पीईओ की भूमिका को लेकर उठ रहे आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर जांच की आवश्यकता है।

 

मनरेगा के कार्यों में स्वीकृति, कार्य निष्पादन, मस्टर रोल, मूल्यांकन और भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का अवैध आर्थिक लेनदेन किया जा रहा है, तो यह गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितता का विषय है।

 

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

 

जिला प्रशासन को उक्त मामले में संज्ञान लेते हुए जिला स्तरीय जांच दल गठित कर जांच करवानी चहिये,यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

इस मामले में जब हमने जनपद के पक्ष जानने के लिए सीईओ संजय चंद्रा को फोन के माध्यम से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन रिसीव नही किया।

 

अब सवाल यह है कि जनपद पंचायत पत्थलगांव में कथित कमीशनखोरी के इन आरोपों पर जिला प्रशासन कब संज्ञान लेगा? क्या पंचायतों को पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी या फिर भुगतान की फाइलें कथित कमीशन के इंतजार में लंबित ही रहेंगी?

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