“प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम की बदहाल तस्वीर! कुमेकेला चौक से लजियापारा तक सड़क नहीं, गड्ढों का महासागर… राहगीर बोले– कब जागेगा पीडब्ल्यूडी?”

 

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव

एक ओर सरकार गांवों को ‘प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम’ बनाने का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर पत्थलगांव विकासखंड का आदर्श ग्राम कुमेकेला अपनी बदहाल सड़क को लेकर सुर्खियों में है। कुमेकेला चौक से लजियापारा चौक तक लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि सड़क पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं, जबकि बरसात ने इन गड्ढों को छोटे-छोटे तालाब में बदल दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ वर्ष पहले गांव शराब दुकान की वजह से चर्चा में था। लगातार आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के बाद शराब दुकान तो हट गई, लेकिन अब गांव की सबसे बड़ी समस्या जर्जर सड़क बन गई है। विडंबना यह है कि आदर्श ग्राम की पहचान अब विकास नहीं, बल्कि गड्ढों से होने लगी है।

कुमेकेला निवासी राजकुमार सक्सेना ने बताया कि सड़क की बदहाली को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं महेंद्र टंडन का कहना है कि बरसात के दिनों में सड़क और गड्ढों में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे रोज कीचड़ से होकर गुजरने को मजबूर हैं और उनकी यूनिफॉर्म स्कूल पहुंचने से पहले ही कीचड़ से सराबोर हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोग अब इस मार्ग को छोड़कर दूसरे रास्तों से आने-जाने को मजबूर हैं। इससे समय, ईंधन और परेशानी तीनों बढ़ रही हैं। हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी मौन है।

सबसे बड़ा सवाल…

क्या प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम की यह बदहाल सड़क अधिकारियों की नींद तोड़ेगी?

या फिर ग्रामीण यूं ही गड्ढों, कीचड़ और जलभराव के बीच अपनी जिंदगी की राह तलाशते

रहेंगे?

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