**“अरबों का मुआवजा… मगर सड़क गायब!” 10 साल से फाइलों में दौड़ रहा पत्थलगां बाईपास, शहरवासी बोले – आखिर जिम्मेदार कौन?”** “डबल इंजन सरकार में भी नहीं बना बाईपास, जाम-हादसों से त्रस्त पत्थलगांव”

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव।

पत्थलगांव शहर का बहुप्रतीक्षित बाईपास सड़क अब लोगों के लिए विकास नहीं, बल्कि एक अबूझ पहेली बन चुका है। करीब एक दशक पहले प्रशासन ने बाईपास निर्माण के नाम पर किसानों और जमीन मालिकों की जमीन अधिग्रहित कर अरबों रुपए का मुआवजा बांट दिया था। उस समय शहरवासियों को उम्मीद थी कि जल्द ही शहर को भारी वाहनों और ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी बाईपास सड़क का एक इंच निर्माण तक शुरू नहीं हो पाया।

अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि लोग पूछने लगे हैं —

आखिर अरबों रुपए गए कहां और सड़क बनी क्यों नहीं?”

पत्थलगांव में बाईपास सड़क का मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता की मिसाल बनता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि प्रदेश और केंद्र दोनों जगह डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद, और जशपुर जिला मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बाद भी पत्थलगांव की यह बहुप्रतीक्षित परियोजना धूल फांक रही है।

पेट्रोल-डीजल संकट ने फिर दिलाई बाईपास की याद

शहरवासियों का गुस्सा उस समय और भड़क उठा जब पेट्रोल-डीजल संकट के चलते वाहनों की लंबी कतारों ने पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को ठप कर दिया। करीब 2 से 3 घंटे तक शहर में जाम की स्थिति बनी रही। हालत यह थी कि यातायात संभालने में लगी पुलिस टीम भी बेबस नजर आई।

लोगों का कहना है कि अगर बाईपास सड़क बन गई होती तो भारी वाहनों का दबाव शहर के भीतर नहीं पड़ता और नागरिकों को रोजाना जाम और हादसों का सामना नहीं करना पड़ता।

“मौत का रास्ता बन चुका है शहर”

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बाईपास सड़क के अभाव में शहर के भीतर लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। भारी वाहन दिन-रात शहर के बीचोंबीच गुजरते हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में बनी रहती है।

नागरिकों ने शासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि —

“जब मुआवजा बांट दिया गया, जमीन अधिग्रहित हो गई, तो आखिर सड़क निर्माण में रुकावट कहां है?”

जनता पूछ रही — जिम्मेदार कौन?

अब पत्थलगांव की जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस परियोजना के अधूरेपन के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है —

शासन, प्रशासन या फिर जनप्रतिनिधि?

वर्षों से सिर्फ आश्वासन और घोषणाएं सुन रही जनता अब जवाब मांगने लगी है।

लोगों का कहना है कि यदि जल्द बाईपास निर्माण शुरू नहीं हुआ तो यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

अब निगाहें सरकार पर

अब देखने वाली बात यह होगी कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में वर्षों से अधर में लटकी पत्थलगांव बाईपास सड़क आखिर कब धरातल पर उतरती है…

या फिर यह परियोजना यूं ही सरकारी फाइलों और नेताओं के भाषणों में दबी रह जाएगी।

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