झूठी पहचान, जंगल में दरिंदगी… मानसिक रूप से दिव्यांग युवती से दुष्कर्म करने वाला दरिंदा उम्रकैद की सलाखों के पीछे वैज्ञानिक साक्ष्यों और पुलिस की मजबूत विवेचना ने दिलाई कड़ी सजा, आरोपी अब्दुल हामिद को आजीवन कारावास

मुकेश अग्रवाल

कुनकुरी। मानसिक रूप से दिव्यांग युवती के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को आखिरकार कानून ने उसके किए की सख्त सजा दे दी। करीब तीन साल पुराने इस जघन्य मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, कुनकुरी ने आरोपी अब्दुल हामिद (28 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला पुलिस की मजबूत विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रभावी अभियोजन का परिणाम माना जा रहा है।

घटना 18 सितंबर 2023 की है। पीड़िता सुबह घर से शौच के लिए निकली थी। लौटते समय आरोपी ने झूठी पहचान बताकर उसका विश्वास जीता और बहला-फुसलाकर अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। इसके बाद वह उसे सुनसान जंगल में ले गया, जहां उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपी ने किसी को घटना बताने पर जान से मारने की धमकी दी और पीड़िता को रास्ते में छोड़कर फरार हो गया।

घटना से डरी-सहमी पीड़िता ने किसी तरह घर पहुंचकर परिजनों को पूरी आपबीती बताई। परिजनों की शिकायत पर थाना कुनकुरी पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए। पीड़िता और आरोपी का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। एफएसएल रिपोर्ट, घटनास्थल का निरीक्षण, गवाहों के बयान तथा न्यायालय में दर्ज पीड़िता के बयान सहित सभी वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत में पेश किया गया।

सभी साक्ष्यों और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आजीवन कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड, धारा 366 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹500 अर्थदंड तथा धारा 419 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹500 अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास का भी प्रावधान किया गया है।

इस फैसले पर पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि जशपुर पुलिस महिलाओं, बालिकाओं और कमजोर वर्गों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है। ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और वैज्ञानिक विवेचना के साथ प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित कर दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाना जशपुर पुलिस की प्राथमिकता है।

यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए भी कड़ा संदेश है कि कानून से बच निकलना संभव नहीं।

 

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