झाड़-फूंक के चक्कर में गई मासूम की जान! सांप के डंसने के बाद अस्पताल की बजाय तांत्रिक के पास ले गए परिजन, इलाज में देरी बनी मौत की वजह



मुकेश अग्रवाल| पत्थलगांव
झाड़-फूंक के चक्कर में गई मासूम की जान!
सांप के डंसने के बाद अस्पताल की बजाय तांत्रिक के पास ले गए परिजन, इलाज में देरी बनी मौत की वज
पत्थलगांव। अंधविश्वास ने एक और मासूम की जिंदगी निगल ली। पत्थलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम दिवानपुर में जहरीले सांप के डंसने से 4 वर्षीय मासूम कार्तिक मांझी की मौत हो गई। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि सांप के काटने के बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लगे रहे। जब बच्चे की हालत बिगड़ गई तो रात करीब 9:30 बजे उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि यदि बच्चे को समय पर अस्पताल लाया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। इलाज में हुई देरी ही उसकी मौत का सबसे बड़ा कारण बनी।
बरसात में बढ़ता है खतरा
बरसात के मौसम में सांप-बिच्छू अक्सर अपने बिलों से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक या ओझा-गुनिया के भरोसे रहना जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अंधविश्वास छोड़ने और सर्पदंश की स्थिति में बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल पहुंचने की अपील की है। विभाग के अनुसार जहरीले सांप के काटने का प्रभावी इलाज केवल अस्पताल में उपलब्ध एंटीवेनम से ही संभव है।