पंडो जाति के जमीन खरीदी बिक्री मामले में पटवारी साय सहित पांच लोगों पर FIR दर्ज दूसरे आदिवासी की भूमि को फर्जी तरीके से बेचा, घास मद की भूमि को भी भूमिस्वामी हक चढ़ाकर कराई रजिस्ट्री, तहसीलदार एनके सिन्हा ने किया था दोनों को प्रमाणित



कापू। पंडो जनजाति की जमीन को धोखे से बेचने वाले गिरोह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो गई है। इस गिरोह ने साथ में घास मद की भूमि को भी भूमिस्वामी हक बनाकर रजिस्ट्री करवा दी। कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था। तहसीलदार ने कापू थाने में मास्टरमाइंड पटवारी राकेश साय, क्रेता संतोष देवी गुप्ता समेत पांच के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। धरमजयगढ़ में जमीनों की हड़पने का सनसनीखेज अपराध हुआ। पंडो जनजाति को आवंटित भूमि को भी फर्जीवाड़ा करके बेच दिया गया। धरमजयगढ़ में इस तरह के कामों के लिए एक गिरोह सक्रिय है, जिसका एक मास्टरमाइंड पटवारी राकेश साय है। 21 फरवरी 2024 को कापू तहसील के डूमरनारा गांव के खनं 409 रकबा 2.104 हे. और 438/1 रकबा 0.635 हे. की रजिस्ट्री हुई।
विक्रेता सुखन पिता बजरंग जाति रावत और क्रेता संतोष देवी गुप्ता पति मनोत गुप्ता रायपुर थे। जांच में पता चला कि खसरा नंबर 409 रकबा 2.104 हे. भूमि टेटू पिता बोधन निवासी डूमरनारा के नाम पर थी। 1975 में टेटू की मृत्यु के बाद सेवा टेटू के नाम पर दर्ज हुआ। नामांतरण पंजी में 1990 से 1997 तक मंगलसाय पिता टेटू, गिरधारी वल्द टेटू व घुममतिया बेव टेटू का नाम दर्ज हुआ। खसरा पांचशाला वर्ष 2013-14 में रूपनी बेवा गिरधारी के नाम जमीन हुई, लेकिन 2023-24 में बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के भूमि अचानक से सुखन पिता बजरंग जाति रावत के नाम कर दी गई। इसी दौरान 21 फरवरी 2024 को सुखन ने संतोष देवी गुप्ता के नाम रजिस्ट्री कर दी।
वहीं खसरा नंबर 438 तो 2015-16 तक घास मद में दर्ज थी। वर्ष 21-22 से 25-26 तक जांच करने पर पता चला कि इस खसरे के तीन टुकड़े हुए जिसका कोई आदेश नहीं है। खनं 438/2 रकबा 0.405 हे. भूमि रतिराम पिता धनसाय, सिमोन पिता लेदा के नाम दर्ज हुआ। 438/3 रकबा 0.483 हे. रतिराम पिता समारू बिरहोर के नाम पर दर्ज हो गया। 438/1 रकबा 0.635 हे. का कोई उल्लेख ही नहीं था लेकिन 21 फरवरी 2024 को यह भूमि सुखन पिता बजरंग के नाम हो गई जिसने संतोष देवी गुप्ता पति मनोज गुप्ता के नाम रजिस्ट्री करवा दी। दोनों ही जमीनों की चौहद्दी, बिक्री नकल पटवारी राकेश साय ने दिया था।
फर्जीवाड़े की यह गजब कहानी है जिसे कलेक्टर के आदेश पर धरमजयगढ़ एसडीएम प्रवीण भगत ने पकड़ा है। कलेक्टर के आदेश पर तहसीलदार कापू ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपी पटवारी राकेश साय पिता शशिभूषण साय, विक्रेता सुखन पिता धनाराम डूमरनारा, क्रेता संतोष देवी गुप्ता पति मनोज गुप्ता रायपुर, दोनों गवाहों संतन राठिया निवासी बकालो और जीवन वर्धन पिता भीमो यादव निवासी जबगा के विरुद्ध भादंसं की धारा 120 बी, 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है। एफआईआर की भनक लगते ही सारे आरोपी फरार हो गए हैं।
सुखन की जाति और पिता का नाम भी फर्जी
जांच के दौरान डुमरनारा में विक्रेता सुखन पिता बजरंग जाति रावत को तलाश किया गया, लेकिन गांव में सुखन पिता धनाराम राठिया जाति कंवर मिला जिसने रजिस्ट्री करवाने की बात बयान में स्वीकारी लेकिन जमीन और क्रेता के बारे में कोई जानकारी नहीं होने की बात कही। इसी तरह गवाह सतन ने कहा कि उसको सुखन ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री में गवाह बनने को कहा था। वहीं दूसरे गवाह जीवन वर्धन ने दो और खिलाडिय़ों पद्मन पटेल और दिगम्बर पटेल निवासी जबगा का नाम लिया। इन दोनों के कहने पर वह गवाह बना।
तहसीलदार एनके सिन्हा ने किया प्रमाणीकरण
सोचिए कि पंडो आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी के नाम चढ़ाकर बेच दिया गया। दूसरी ओर घास मद की शासकीय भूमि को निजी बताकर रजिस्ट्री करवा ली गई। इस गंभीर मामले में तहसीलदार की भूमिका बेहद संदेहास्पद है। तत्कालीन कापू तहसीलदार नंदकिशोर सिन्हा ने दोनों रजिस्ट्रियों को प्रमाणित किया। विक्रेता की पहचान भी प्रमाणित की। इस खेल में कई और लोग शामिल हैं।