पत्थलगांव सिविल अस्पताल में लापरवाही का आरोप: हार्ट अटैक से शिक्षक की मौत, डॉक्टर-नर्स को ढूंढते रहे परिजनज्वाइंट डायरेक्टर अनिल शुक्ला ने लिया संज्ञान, जशपुर CMHO को नोटिस जारी कर मांगी जांच रिपोर्ट

 

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव।

रविवार सुबह पत्थलगांव सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए जब शिक्षक कार्तिकेश्वर निषाद की हार्ट अटैक से मौत के बाद उनके परिजन घंटों तक अस्पताल परिसर में डॉक्टर और नर्स को ढूंढते रहे।  अस्पताल के गेट के पास खड़ी कार में ही शिक्षक की मौत हो गई, लेकिन समय पर उपचार तो दूर, अस्पताल में कोई जिम्मेदार कर्मचारी तक नजर नहीं आया।

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 8 बजे के आसपास शिक्षक कार्तिकेश्वर निषाद को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ।  तत्काल सिविल अस्पताल पत्थलगांव लेकर पहुंचे, लेकिन वहां का नजारा चौंकाने वाला था। अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई अटेंडर। सूचना पटल भी खाली पड़ा था, जिससे यह तक पता नहीं चल पा रहा था कि ड्यूटी पर कौन डॉक्टर तैनात है।

जब काफी देर बाद डॉक्टर से संपर्क हुआ तो उन्होंने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि “मेरा ड्यूटी टाइम खत्म हो चुका है।” इस बयान ने आम लोगों को झकझोर कर रख दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि अस्पताल में आपात स्थिति में भी मरीजों को डॉक्टर न मिलें तो आम जनता आखिर किससे उम्मीद करे।

ड्यूटी चार्ट में जिस डॉक्टर का नाम दर्ज था, उन्होंने खुद को ड्यूटी पर नहीं बताया, वहीं जो डॉक्टर मौजूद बताए जा रहे थे उन्होंने ड्यूटी खत्म होने की बात कह दी। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

घटना के बाद पत्थलगांव से लेकर जशपुर तक स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के रवैये को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखी गई। लोगों को यह आशंका थी कि मामले में कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं होगी।

जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की इतने बड़े लापरवाही एवं अनुशासनहीन मामले पर चुप्पी साधकर खुली आंखों से देखना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है आखिर प्रशासन की अधिकारी कर्मचारी पर कार्यवाही तो दूर मामले को संज्ञान लेना भी समझ से परे नजर आता है एवं पूर्व के मामलों की तरह लीपा पोती करने के प्रयास जारी है

हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा संभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर अनिल शुक्ला ने संज्ञान लिया है। उन्होंने जशपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को नोटिस जारी कर पूरे मामले की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अब यह देखना बाकी है कि जशपुर स्वास्थ्य विभाग इस संवेदनशील मामले में कितनी गंभीरता से जांच करता है और जिम्मेदारी से बचने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल इस घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है और आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — “अगर अस्पताल में भी डॉक्टर न मिलें, तो मरीज जाएं तो जाएं कहां?”

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