64 लाख की बाउंड्रीवॉल में पुरानी ईंटों का खेल? नई दीवार में चार दशक पुरानी ईंटें लगाने के आरोप से मचा हड़कंप, शिकायत पर अधिकारियों ने रुकवाया निर्माण कॉलेज की जमीन छोड़कर अंदर खिसकाई जा रही दीवार! प्राचार्य ने SDM को दी लिखित सूचना, PWD ने पुरानी जगह पर ही निर्माण के दिए निर्देश

 

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव। शासकीय ठाकुर शोभा सिंह महाविद्यालय की करीब 64 लाख रुपए की लागत से बन रही नई बाउंड्रीवॉल निर्माण शुरू होते ही सवालों के घेरे में आ गई है। नई बाउंड्रीवॉल में पुरानी लाल ईंटों के इस्तेमाल के आरोप ने निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इतना गरमाया कि शिकायत के बाद राजस्व और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य तत्काल रुकवा दिया।

नगर पंचायत उपाध्यक्ष अजय बंसल ने आरोप लगाया कि नई बाउंड्रीवॉल के निर्माण में निर्धारित मापदंडों के अनुसार फ्लाई ऐश ईंटों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन ठेकेदार द्वारा पुरानी बाउंड्रीवॉल से निकाली गई ईंटों को साफ कर दोबारा निर्माण में लगाया जा रहा था। उनका कहना है कि जब शासन ने नई बाउंड्रीवॉल के लिए लाखों रुपए स्वीकृत किए हैं, तो फिर निर्माण में पुरानी सामग्री का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?

चार दशक पुरानी दीवार की ईंटें फिर से दीवार में?

उपाध्यक्ष बंसल के अनुसार कॉलेज की पुरानी बाउंड्रीवॉल करीब चार दशक पुरानी थी। आरोप है कि पुरानी दीवार को तोड़कर निकाली गई ईंटों से मिट्टी और पुराना सीमेंट हटाने के बाद उन्हें नई दीवार में फिर से लगाया जा रहा था।

इस आरोप ने निर्माण स्थल की गुणवत्ता जांच और साइट इंजीनियर की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर निर्माण स्थल पर सामग्री की जांच और गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? यदि पुरानी ईंटों का इस्तेमाल हो रहा था तो इसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया?

बाउंड्रीवॉल भी खिसकी तो सवाल और गहरे!

मामला केवल पुरानी ईंटों तक सीमित नहीं है। नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नई बाउंड्रीवॉल पुरानी स्थिति से अंदर की ओर खिसकाकर बनाई जा रही है, जिससे कॉलेज की शासकीय भूमि का हिस्सा निर्माण से बाहर छूटने की आशंका है।

उन्होंने स्थानीय लोगों और भूमाफियाओं से मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

प्राचार्य ने भी SDM कार्यालय में दी लिखित सूचना

कॉलेज के प्राचार्य आर.एस. कांत ने बताया कि कॉलेज की भूमि को छोड़कर अंदर की ओर बाउंड्रीवॉल बनाए जाने की जानकारी SDM पत्थलगांव कार्यालय को लिखित रूप से दी गई है।

प्राचार्य के अनुसार बुधवार को PWD के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ठेकेदार को पुरानी बाउंड्रीवॉल की जगह के अनुरूप ही नई बाउंड्रीवॉल बनाने, शासकीय भूमि का कोई हिस्सा नहीं छोड़ने तथा पुरानी ईंटों को हटाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही निर्माण कार्य भी रुकवा दिया गया।

अब जांच बताएगी—गलती किसकी और फायदा किसका?

शिकायत के बाद अधिकारियों द्वारा निर्माण रोकना इस पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में निर्माण की स्वीकृत तकनीकी शर्तें, इस्तेमाल की गई सामग्री, बाउंड्रीवॉल की वास्तविक सीमा और शासकीय भूमि की स्थिति क्या सामने आती है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल सिर्फ ठेकेदार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्माण की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और तकनीकी अमले की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

फिलहाल 64 लाख की बाउंड्रीवॉल का निर्माण ब्रेक पर है और जांच के बाद ही तय होगा कि दीवार में पुरानी ईंटों का इस्तेमाल महज आरोप था या सरकारी निर्माण में नियमों की अनदेखी का मामला।

 

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