मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में लापरवाही से दो हादसे — छठ घाट में डूबने से मौत और सड़क हादसे में एक की मृत्यु, एक घायल, रेस्क्यू टीम की देरी पर पूर्व विधायक यू डी मिंज ने जताई नाराज़गी

 

जशपुर,

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही के कारण दो दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। एक घटना ढोंढ़ी डांड नदी के पास सड़क हादसे की है, जिसमें मंगल साय की मौत हो गई और वीर कुमार राम गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी घटना कुनकुरी के छठ घाट की है, जहां 42 वर्षीय चुन्नू राम की डूबने से मौत हो गई। दोनों ही मामलों में रेस्क्यू टीम और एम्बुलेंस की देरी ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

 

पहली घटना कुनकुरी के छठ घाट की है, इसी बीच संदीप राम उर्फ चुन्नू राम पानी में डूब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी, लेकिन रेस्क्यू टीम देर शाम अंधेरा होने के बाद ही मौके पर पहुंच सकी। दो सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुंचकर भी बचाव कार्य नहीं कर पाई। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर कोई मदद नहीं मिली। अंततः अंबिकापुर से विशेष रेस्क्यू टीम दोपहर 12 बजे पहुंची, तब जाकर शव को 1.30 बजे बाहर निकाला जा सका।

 

दूसरी घटना डोडीडंड क्षेत्र की है, जहां सड़क किनारे हुए एक्सीडेंट में मंगल साय की मौत हो गई और वीर कुमार राम गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि एम्बुलेंस की तत्काल व्यवस्था नहीं थी, जिससे समय पर उपचार न मिलने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।

 

इन दोनों घटनाओं पर पूर्व विधायक यू डी मिंज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि —

“मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही बेहद शर्मनाक है। यह प्रशासन की असंवेदनशीलता और कर्तव्यहीनता का स्पष्ट उदाहरण है।”

 

उन्होंने आगे कहा कि —

“मुख्यमंत्री जी का विधानसभा, हमारा कुनकुरी — हमारी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यहां नई ICU व वेंटिलेटर युक्त ट्रामा एंबुलेंस लाई गई थी , जो हर आपात स्थिति में तुरंत पहुंचकर जनसेवा करती थी। लेकिन वर्तमान में उसे लोदाम भेज दिया गया, जबकि वही एंबुलेंस हर समय काम आती थी। यह निर्णय शर्मनाक और जनविरोधी है।”

 

पूर्व विधायक यू डी मिंज ने जिला प्रशासन से दोनों घटनाओं की तत्काल जांच की मांग की है तथा मृतकों मंगल साय और चुन्नू राम के परिवारों को उचित मुआवज़ा, और घायल वीर कुमार राम को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने की अपील की है।

 

ग्रामीणों ने भी प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि छठ जैसे महापर्व पर अगर सुरक्षा और रेस्क्यू व्यवस्था पहले से मुस्तैद रहती, तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता था। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सभी प्रमुख घाटों और नदी क्षेत्रों में स्थायी रेस्क्यू यूनिट, एम्बुलेंस व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान न जाए।

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