सिविल अस्पताल में ‘रोशनी’ पर चोर का हाथ! दर्जनों बल्ब उड़ा ले गया शातिर, CCTV ने खोली पोल अस्पताल में मरीजों का इलाज जारी, चोर साहब ने बल्बों का ‘इलाज’ कर दिया! सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव। पत्थलगांव सिविल अस्पताल में चोरी की एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। यहां कोई दवा, उपकरण या मेडिकल सामान नहीं, बल्कि दर्जनों बल्ब ही चोरी हो गए! घटना 18 सितंबर 2026 की बताई जा रही है।

चोरी का अंदाज भी कुछ ऐसा रहा कि चोर महोदय अस्पताल पहुंचे और एक-एक कर बल्ब निकालकर चलते बने। लेकिन शायद उन्हें यह मालूम नहीं था कि अस्पताल की ‘तीसरी आंख’ यानी CCTV कैमरा उनकी पूरी करतूत रिकॉर्ड कर रहा है।

चोर ने सोचा—अंधेरा कर चलते हैं!

CCTV फुटेज में कथित तौर पर एक व्यक्ति अस्पताल परिसर में लगे बल्ब निकालता दिखाई दे रहा है। यानी अस्पताल को रोशन करने वाले बल्बों पर ही चोर की नजर पड़ गई।

अब सवाल यह है कि जिस अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वहां परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

CCTV जागता रहा, सुरक्षा व्यवस्था सोती रही?

घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रबंधन ने पत्थलगांव पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और CCTV फुटेज के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार चोरी गए बल्बों की कीमत हजारों रुपये बताई जा रही है। रकम भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन सरकारी अस्पताल परिसर से दर्जनों बल्बों का चोरी हो जाना अपने आप में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

अब अस्पताल को रोशन करेगा कौन?

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर अस्पताल परिसर में चोर इतनी आसानी से घूमकर बल्ब निकाल सकता है, तो रात के समय सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है?

क्या अस्पताल में नियमित सुरक्षा गार्ड तैनात थे?

क्या रात में परिसर की निगरानी होती है?

और अगर होती थी, तो चोर दर्जनों बल्ब निकालकर आखिर निकल कैसे गया?

CCTV में चेहरा कैद, अब पुलिस की नजर चोर पर

फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर कथित चोर की पहचान करने में जुटी है। अस्पताल प्रबंधन ने भी आंतरिक जांच की बात कही है।

अब देखना यह है कि अस्पताल से गायब हुए बल्बों की रोशनी पुलिस जांच में कब लौटती है।

“मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल बना था, लेकिन चोर ने यहां बल्बों का ही ‘इलाज’ कर दिया… अब देखना है कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था का इलाज कब होता है!”

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