चार दिन बाद भी नहीं मिली जांच रिपोर्ट, आरोग्य लैब की व्यवस्था पर उठे सवाल! डायलिसिस की जरूरत वाले मरीज को रिपोर्ट के लिए करना पड़ा इंतजार, कर्मचारियों का जवाब—“जिले से रिपोर्ट नहीं आई” शासन का दावा 24 से 36 घंटे में रिपोर्ट का, पत्थलगांव में चार दिन बाद भी मरीज के हाथ खाली



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर एवं समयबद्ध पैथोलॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई अटल आरोग्य लैब की व्यवस्था पत्थलगांव सिविल अस्पताल में सवालों के घेरे में आ गई है। शासन स्तर पर जहां बड़ी जांचों की रिपोर्ट 24 से 36 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है, वहीं पत्थलगांव में सैंपल देने के चार दिन से अधिक समय बाद भी रिपोर्ट नहीं मिलने का मामला सामने आया है।
मामला खरकट्टा निवासी सुनीता तिग्गा से जुड़ा है, जिन्हें डायलिसिस की आवश्यकता बताई गई है। परिजनों के अनुसार आवश्यक जांच के लिए आरोग्य लैब में सैंपल दिया गया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में गंभीर मरीज को आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के लिए रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ा।

24-36 घंटे की व्यवस्था, फिर चार दिन का इंतजार क्यों?
बताया जा रहा है कि अटल आरोग्य लैब के माध्यम से छोटी जांचों की रिपोर्ट अस्पताल में ही तत्काल उपलब्ध कराई जाती है, जबकि बड़ी जांचों के सैंपल जिले स्तर पर भेजे जाते हैं। इनकी रिपोर्ट 24 से 36 घंटे के भीतर प्राप्त होने के बाद मरीज के मोबाइल नंबर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
लेकिन पत्थलगांव में सामने आए इस मामले ने पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज के परिजनों द्वारा रिपोर्ट के संबंध में जानकारी मांगने पर कथित तौर पर उन्हें यह जवाब दिया गया कि “जिले से ही रिपोर्ट नहीं आई है, रिपोर्ट आने पर दे दी जाएगी।”
रिपोर्ट के इंतजार में मरीज, जिम्मेदारी किसकी?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब मरीज की बीमारी ऐसी हो जिसमें समय पर जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार जरूरी हो, तब रिपोर्ट में अनावश्यक देरी की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? शासन ने यदि जांच रिपोर्ट के लिए समय-सीमा तय की है तो उसका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी, लैब कर्मचारियों और स्वास्थ्य विभाग की बनती है।
मरीजों का कहना है कि उन्हें रिपोर्ट के लिए बार-बार लैब के चक्कर लगाने पड़ते हैं और स्पष्ट जानकारी भी नहीं मिल पाती। ऐसे में निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सीएचएमओ बोले—24 घंटे में मिल जानी चाहिए रिपोर्ट
इस मामले में जशपुर सीएचएमओ डॉ. जात्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि आरोग्य लैब की छोटी जांचों की रिपोर्ट मौके पर ही उपलब्ध कराई जाती है, जबकि बड़ी जांचों की रिपोर्ट के लिए 24 से 36 घंटे का समय लगता है और रिपोर्ट उपलब्ध होने पर मरीज के मोबाइल नंबर पर भेजी जाती है।
वहीं पत्थलगांव बीएमओ डॉ. मिंज ने भी कहा कि सैंपल की रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर मिल जानी चाहिए। यदि इस तरह की लापरवाही हुई है तो मामले की जांच कराई जाएगी।
ठेका निजी हाथों में, निगरानी कौन करेगा?
सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरोग्य लैब का संचालन निजी एजेंसी के माध्यम से कराया है। उद्देश्य साफ है—ग्रामीण मरीजों को महंगी और दूर की जांचों के लिए परेशान न होना पड़े और समय पर रिपोर्ट मिल सके।
लेकिन यदि निर्धारित समय-सीमा के बावजूद मरीजों को कई-कई दिनों तक रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़े, तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है कि ठेका तो दे दिया गया, लेकिन निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कहां है?
पत्थलगांव में सामने आया यह मामला केवल एक मरीज की रिपोर्ट में देरी का नहीं, बल्कि आरोग्य लैब की पूरी कार्यप्रणाली और उसकी निगरानी व्यवस्था की परीक्षा बन गया है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग जांच के नाम पर केवल आश्वासन देता है या जिम्मेदारी तय कर वास्तविक कार्रवाई भी करता है।