“सरकारी शराब अहाता या अव्यवस्थाओं का अड्डा?… महंगा चखना, गंदगी का साम्राज्य, पार्किंग गायब, विभाग बना मूकदर्शक!” पत्थलगांव के झोंपड़ीनुमा अहाते में सुविधाओं के नाम पर ‘जीरो’, ग्राहकों से मनमानी वसूली के आरोप… ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी।



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव।
नगर के रायगढ़ रोड स्थित सरकारी शराब दुकान से सटा झोंपड़ीनुमा शासकीय अहाता इन दिनों अव्यवस्थाओं की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। यहां शराब पीने पहुंचने वाले लोगों को सुविधा कम और परेशानियां ज्यादा मिल रही हैं। गंदगी, बदबू, मनमानी वसूली, पार्किंग का अभाव और यातायात जाम जैसी समस्याओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद आबकारी विभाग और प्रशासन अब तक मूकदर्शक बना हुआ है।
“जेब पर डाका… चखने के नाम पर खुली लूट!”
अहाते में मिलने वाले चखने की कीमतें ग्राहकों के होश उड़ा रही हैं। आरोप है कि मामूली डिस्पोजल गिलास तक के 5 रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि 20 रुपये में मिलने वाला चखना 10 रुपये के बराबर भी नहीं होता। ग्रामीण ग्राहकों का कहना है कि विरोध करने पर संचालक के कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है। लोगों का आरोप है कि यहां सड़े-गले फल और कई दिन पुराना फ्रिज में रखा चिकन-मछली खुलेआम परोसा जाता है, जिससे स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
“सफाई के नाम पर शून्य… बैठना भी मजबूरी!”
अहाते में न साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था है, न शौचालय, न पेयजल और न ही बैठने की उचित सुविधा। चारों ओर फैली गंदगी और बदबू के बीच लोग मजबूरी में शराब का सेवन करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सरकारी अहाता कम, अव्यवस्था का अड्डा ज्यादा नजर आता है।
“पार्किंग नहीं… सड़क पर जाम ही जाम!”
अहाते के बाहर पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं होने से वाहन सड़क किनारे बेतरतीब खड़े कर दिए जाते हैं। रायगढ़ रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर आए दिन लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। कई बार ट्रकों की लंबी कतारें लगने से आवागमन प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
“शिकायतें हुईं, कार्रवाई नहीं… अब आंदोलन की तैयारी”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अहाते की अव्यवस्थाओं को लेकर कई बार लिखित शिकायतें आबकारी विभाग और प्रशासन को भेजी जा चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है और जल्द ही आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है।
अब बड़ा सवाल…
जब सरकारी अहाते में ही ग्राहकों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रहीं, मनमानी वसूली के आरोप लग रहे हैं और सड़क पर जाम से लोग परेशान हैं, तो आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा? या फिर यह अव्यवस्था यूं ही भगवान भरोसे चलती रहेगी?