हैवान बाप को उम्रकैद: 13 साल की बेटी की अस्मिता से 3 साल तक खिलवाड़, जशपुर कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा एक महीने में पूरी जांच, 20 गवाह और ठोस सबूत… जशपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से दरिंदे को मिला उम्रकैद का दंड



मुकेश अग्रवाल
जशपुर। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाले एक सनसनीखेज मामले में जशपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने अपनी ही 13 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म करने वाले आरोपी पिता कलेश्वर राम विश्वकर्मा (42 वर्ष) को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।
मामला थाना कांसाबेल क्षेत्र का है, जहां 2 मई 2026 को पीड़िता की मां ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका पति पिछले तीन वर्षों से अपनी ही नाबालिग पुत्री का यौन शोषण कर रहा था। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं पॉक्सो अधिनियम की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर उसे उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
एक महीने में पूरी विवेचना, कोर्ट में पेश हुआ मजबूत चाला
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में थाना कांसाबेल पुलिस ने पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मेडिकल परीक्षण, न्यायालयीन बयान और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी कीं। निरीक्षक जितेंद्र कुमार ताम्रकार ने संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता के साथ जांच पूरी कर 17 जून 2026 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
20 गवाह, पुख्ता सबूत… बच नहीं पाया दरिंदा
विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार तिर्की ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी करते हुए 20 गवाहों के साक्ष्य प्रस्तुत किए। पुलिस की मजबूत विवेचना और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) एवं विशेष पॉक्सो न्यायालय, जशपुर के न्यायाधीश श्री जनार्दन खरे ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
एसएसपी का दो टूक संदेश
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर जशपुर पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई, समयबद्ध विवेचना और प्रभावी अभियोजन के जरिए दोषियों को कठोरतम सजा दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जशपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई और मजबूत अभियोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए कानून का शिकंजा बेहद सख्त है।