8 लाख से ज्यादा के पीडीएस बारदानों का खेल, आखिरकार खुला राज मुख्य आरोपी रिजवान अली और खरीददार सुधीर साहू गिरफ्तार, पुलिस ने भेजा जेल मामला – थाना कांसाबेल क्षेत्र, जशपुर जिला



मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव/कांसाबेल।
सरकारी योजनाओं के सहारे चलने वाली व्यवस्था में जब “बारदानों” का हिसाब ही गड़बड़ा जाए, तो मामला सीधे पुलिस तक पहुंचना तय है। कुछ ऐसा ही हुआ कांसाबेल क्षेत्र में, जहां पीडीएस के हजारों बारदानों का हिसाब किताब ऐसा उलझा कि आखिरकार पुलिस को दखल देना पड़ा।
कहानी की शुरुआत होती है वर्ष 2022-23 से, जब शासकीय उचित मूल्य दुकानों से पीडीएस बारदानों के संकलन और परिवहन की जिम्मेदारी अनुबंध के आधार पर कुछ लोगों को सौंपी गई थी। इसी कड़ी में ग्राम देवेल्ला मानपुर, जिला सूरजपुर निवासी रिजवान अली को भी यह जिम्मेदारी मिली। लेकिन जिम्मेदारी निभाने के बजाय, आरोप है कि बारदानों का रास्ता ही बदल गया।
जांच में खुलासा हुआ कि विकासखंड कांसाबेल के विभिन्न उचित मूल्य दुकानों से संकलित 33 हजार 580 नग पीडीएस बारदानों को विपणन संघ के कुनकुरी गोदाम तक पहुंचना था, मगर वे वहां पहुंचे ही नहीं।
अब जब बारदानों का हिसाब लगाया गया, तो रकम निकली करीब 8 लाख 39 हजार 500 रुपये — यानी सरकारी संपत्ति का बड़ा गड़बड़झाला सामने आ गया।
मामले की शिकायत मिलने पर कलेक्टर जशपुर के निर्देश पर जांच कमेटी गठित हुई। कमेटी ने जांच की तो पाया कि बारदानों का “सफर” गोदाम की बजाय कहीं और ही तय हो गया था। इसके बाद थाना कांसाबेल में भारतीय दंड संहिता की धारा 408, 420 और 411 के तहत अपराध दर्ज किया गया।
उधर जशपुर जिले के पुलिस कप्तान डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर विशेष पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने सूरजपुर और अंबिकापुर तक दबिश दी और आखिरकार मुख्य आरोपी रिजवान अली को सूरजपुर से तथा बारदानों के खरीददार सुधीर साहू को अंबिकापुर से हिरासत में लेकर जशपुर लाया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
इतना ही नहीं, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त
पिकअप वाहन क्रमांक MP 65 GA 0244 और करीब 4000 नग बारदानों को भी जब्त कर लिया है।
हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है — पुलिस अभी भी बाकी बारदानों की तलाश में जुटी हुई है।
इस पूरे मामले की कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में
उप निरीक्षक अशोक यादव, सहायक उप निरीक्षक राजेश कुमार यादव, आरक्षक राजकुमार भगत, सुभाष चंद्र बोस और नगर सैनिक जोगेंद्र यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।