मुख्यमंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बुरा  पत्थलगांव सिविल अस्पताल की लापरवाही पर उठे सवाल: अस्पताल गेट से 50 मीटर दूर शिक्षक की हार्ट अटैक से मौत, डॉक्टर-नर्स नहीं मिले मौजूद ड्यूटी बोर्ड खाली, डॉक्टरों का नहीं मिला पता; परिजन और लोग आधे घंटे तक करते रहे मदद की गुहार

मुख्यमंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बुरा

पत्थलगांव सिविल अस्पताल की लापरवाही पर उठे सवाल: अस्पताल गेट से 50 मीटर दूर शिक्षक की हार्ट अटैक से मौत, डॉक्टर-नर्स नहीं मिले मौजूद

 

ड्यूटी बोर्ड खाली, डॉक्टरों का नहीं मिला पता; परिजन और लोग आधे घंटे तक करते रहे मदद की गुहा

मुकेश अग्रवाल/पत्थलगांव

मुख्यमंत्री जैसे संवेदनशील गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बत से बदतर नजर आता है जहां डॉक्टर और ड्यूटी रत कर्मचारी अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़कर घरों में आराम फरमाते हुए शासन के वेतन पर मजे कर रहे हैं वहीं धरती के भगवान समझे जाने वाले डॉक्टर केवल डिग्री लेकर मरीज के साथ खिलवाड़ करते नजर आते हैं जिसका जीता जागता उदाहरण आज पत्थलगांव के सिविल अस्पताल में एक सरकारी शिक्षक की हार्ट अटैक से हुई मौत पर देखने को मिली। इन सरकारी अस्पतालों का स्थानीय प्रशासन के उच्च अधिकारी कभी भी आकस्मिक निरीक्षण तो दूर ड्यूटी के समय भर भी जांच करना मुनासिब नहीं समझा जाता है जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अपने कर्तव्यों से विमुख हो चुका है ड्यूटी के समय यहां इक्का दुक्का डॉक्टर ही अपने ड्यूटी कक्ष में नजर आते हैं बाकी दर्जनों डॉक्टर केवल खानापूर्तिकर अपने प्राइवेट क्लीनिक में नजर आते हैं।

पत्थलगांव सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब अस्पताल से महज करीब 50 मीटर की दूरी पर कार में बैठे शिक्षक कार्तिकेश्वर निषाद की हार्ट अटैक से मौत हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने उनकी जान बचाने के लिए भरसक प्रयास किया, लेकिन अस्पताल में समय पर डॉक्टर या नर्स की मौजूदगी न होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।

बताया जा रहा है कि घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत सीपीआर देकर शिक्षक को बचाने की कोशिश की। इसके बाद कार्तिकेश्वर निषाद को कार सहित सिविल अस्पताल के मुख्य गेट तक लाया गया, लेकिन वहां न कोई अटेंडर मौजूद था और न ही कोई वार्ड बॉय।

परिवार के लोग और अन्य नागरिक डॉक्टर या नर्स को बुलाने के लिए अस्पताल के अंदर ऊपर तक गए, लेकिन वहां भी तत्काल कोई मौजूद नहीं मिला। इस दौरान अस्पताल में लगे आपातकालीन ड्यूटी बोर्ड पर भी डॉक्टर का नाम, मोबाइल नंबर और तारीख खाली पाई गई, जिससे यह भी पता नहीं चल पा रहा था कि उस समय ड्यूटी पर कौन सा डॉक्टर तैनात है।

अन्य स्रोतों से जानकारी मिलने पर सुबह 7 बजकर 52 मिनट पर ड्यूटी डॉक्टर बताए जा रहे डॉ. संदीप भारतेंदु को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन पर अपनी ड्यूटी नहीं होने की बात कही। इसके बाद फिर से परिवार के लोगों को नर्स रूम भेजा गया। करीब 8 बजे के आसपास डॉ. जया परहा अस्पताल के गेट तक पहुंचीं।

इसी दौरान बीएमओ डॉ. जेम्स मिंज का फोन भी आया, जिसमें अस्पताल में डॉक्टर और नर्स की अनुपस्थिति की जानकारी दी गई। मौके पर मौजूद लोगों ने डॉ. जया परहा से वहीं पर मरीज की स्थिति देखने का अनुरोध किया, लेकिन अपने आप को धरती का भगवान का दर्जा को नकारते हुए अपनी संवेदनशीलता का परिचय नहीं देते हुए मौके पर मरीज को छू कर देखना भी मुनासिब नहीं समझा उन्होंने मरीज को ऊपर लाने की बात कही। इस पर मौजूद लोगों और डॉक्टर के बीच बहस भी हुई।

बाद में पास में मौजूद डॉ. शकुंतला को बुलाया गया, जिन्होंने कार्तिकेश्वर निषाद की जांच के बाद बताया कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद अस्पताल की आगे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए डॉ. जया परहा से कहा गया, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया कि उनका ड्यूटी समय समाप्त हो चुका है। उस समय सुबह के 8 बजकर 8 मिनट हो रहे थे।

स्थानीय पार्षद अजय अग्रवाल ने बताया कि सुबह करीब 7 बजकर 10 मिनट से ही लोग अस्पताल के गेट के पास मौजूद थे और लगातार डॉक्टर व नर्स को ढूंढ रहे थे, लेकिन काफी देर तक कोई नहीं मिला। वहीं समाजसेवी मुकेश अग्रवाल ने कहा कि आसपास मौजूद टिंकू सामंत ने सीपीआर देकर जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने से शिक्षक को बचाया नहीं जा सका।

गौरतलब है कि 2 मार्च को अस्पताल के ड्यूटी चार्ट के अनुसार शनिवार रात 8 बजे से रविवार सुबह 8 बजे तक ड्यूटी डॉक्टर के रूप में डॉ. संदीप भारतेंदु का नाम दर्ज है। इसके बावजूद फोन पर ड्यूटी न होने की बात कहना और अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा पटल का खाली होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि जब आपात स्थिति में मरीज को बचाने के लिए पहले 1 से 5 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, तब यदि सरकारी अस्पताल में ही डॉक्टर और नर्स का पता न हो तो लोग मरीज को आखिर कहां ले जाएं।

अब स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पत्थलगांव सिविल अस्पताल की व्यवस्थाएं आखिर कब सुधरेंगी और मरीजों को समय पर इलाज कब मिल पाएगा।

अस्पताल में चौकीदार की मौजूदगी पर उठ रहे सवाल

पत्थलगांव सिविल अस्पताल में दो-दो गार्ड की व्यवस्था की गई है लेकिन दोनों गार्ड हमेशा ही नशे के लत के आदी होने के कारण गायब रहते हैं जिसकी शिकायत कई बार बीएम ओ से करने पर दिखाने की बात कह कर पल्ला झाड़ दिया जाता है लेकिन आज तक इन पर कार्यवाही नहीं करना गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है।

कलेक्टर के आदेशों की हो रही अवहेलना

जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने अपने प्रथम पत्थलगांव प्रवास के दौरान अस्पताल में ड्यूटी डॉक्टर का बड़ा चार्ट मोबाइल नंबर सहित लगाने के निर्देश दिए थे लेकिन आज तक पत्थलगांव सिविल अस्पताल में किसी तरह डॉक्टरों की व कर्मचारियों की लिस्ट का कोई पता नहीं है पूरा सिविल अस्पताल अवस्थाओं की भेंट चढ़ चुका है।

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