राहा संस्था में फर्जी आयकर अधिकारी बनकर 32 लाख रुपए ठगी के आरोपी को पुलिस में रायगढ़ से दबोचा फरार एक आरोपी की पुलिस कर रही सरगर्मी से तलाश सेवा के लिए बनी संस्था द्वारा बेशकीमती जमीन ब्रिक्री को लेकर उठ रहे सवाल??

मुकेश अग्रवाल/पत्थलगांव। राहा संस्था की सिस्टर एलिजावेथ नल्लूर बी.टी.आई.चौक पत्थलगांव निवासी ने पत्थलगांव थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद पूरी जांच प्रक्रिया पश्चात आखिरकार इस मामले में दो युवक के खिलाफ 420 का अपराध कायम किया गया है इस मामले में पुलिस जांच मे पाया गया कि रामानन्द सिंह, एवं राकेश गुप्ता के द्वारा योजनाबद्ध तरीके से राकेश गुप्ता को फर्जी आयकर अधिकारी बनाकर सिस्टर एलिजाबेथ से 32 लाख रूपये की ठगी किया गया पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा- 419,420,120(B) भा.द.वि. का अपराध पंजीबद्ध किया है। मिली जानकारी के मुताबिक सिस्टर एलिजाबेथ ने शिकायत किया था की उनकी संस्था में वर्ष 2009 से रामानन्द सिंह एम.आई.एस. मैनेजर के पद पर कार्यरत रहा है, जिसे बार-बार अनुशासनहिनता की चेतावनी दी जाने पर उससे जून 2021 में त्यागपत्र लिया जाकर जुलाई 2021 में संस्था से कार्यमुक्त किया गया है। चूंकि रामानंद सिंह मैनेजर के पद पर कार्यरत था, इस कारण उसे संस्था की समस्त जानकारी थी। हमारी संस्था राहा के नाम पर ग्राम बकना, तह0 राजपुर (बलरामपुर) में जमीन है जिसे संस्था की ओर से बिक्री करने का सौदा अम्बिकापुर के विनोद अग्रवाल वगै0 से मई 2021 में किया गया है। जमीन के रजिस्ट्री में शासकीय मूल्यांकन के अनुसार लगभग 55 लाख रूपये का स्टाम्प ड्युटी देय है, चूंकि विक्रय मूल्य एक बड़ी धनराशि है जिस कारण जमीन को बिक्री करने के लिये संस्था की ओर से अन्य औपचारिकताओं की पूर्ति की जा रही थी जिसकी पूरी जानकारी रामानंद सिंह को मैनेजर होने के कारण थी और वह स्वयं संस्था की तरफ से भूमि बिक्री की औपचारिकताओं की पूर्ति में लगा हुआ था। जमीन के रजिस्ट्री के लिये स्टाम्प पेपर की खरीदी की जानी थी जिसके लिये 32 लाख रूपये नगद विनोद अग्रवाल और उनके 9 हिस्सेदारों द्वारा मेरे कार्यालय में दिनांक 25.07.2021 को पहुंचाया गया था और शेष 25 लाख रूपये एक सप्ताह बाद देने को बोले थे ताकि स्टाम्प खरीदी हेतु 55 लाख रूपये संस्था की ओर से मेरे द्वारा चालान के जरिये जमा कराया जाता।मेरे कार्यालय में 30 लाख रूपये नगद पड़े होने की जानकारी रामानन्द सिंह को थी और उसे 27 जुलाई को कार्यमुक्त कर दिया गया था। दिनांक 31.07.2021 को दिन के 01:00 बजे के करीब एक व्यक्ति मेरे कार्यालय में आया और अपने आप को आयकर अधिकारी होना बताकर मेरे पूरे कार्यालय को आयकर अधिकारियों द्वारा घेरे जाने की जानकारी देते हुए कहा कि अपने किसी पुरूष कर्मचारी को अपने मदद के लिये बुला ले जिससे आपके कार्यालय की पूरी जानकारी हो, क्योंकि मुझे आपके पूरे कार्यालय की तलाशी लेनी है। उस व्यक्ति के कहने पर मेरे द्वारा रामानन्द सिंह को फोन करने पर वह तत्काल कार्यालय आ गया और आते के साथ ही रामानन्द कहना शुरू कर दिया कि आयकर की रेड पड़ गयी है सिस्टर मामले को मैनेज करिये, नहीं तो मामला बिगड़ जायेगा। रामानन्द के बातों में हामी मिलाते हुये आने वाला व्यक्ति मुझ पर दबाव बनाने लगा कि अभी मैं कार्यालय के अंदर अकेले आया हूं, यदि पूरी टीम अंदर आ गई तो कुछ भी मैनेज नहीं होगा, इसलिये जो बात करना है, अभी तत्काल करो। इतने में रामानन्द सिंह कहने लगा कि स्टाम्प के लिये चालान पटाने वाला जो 32 लाख रूपये आया है, उसका कोई कागज हमारे पास नहीं है, इसके अलावा और कोई पैसा नगद में हमारे संस्था में नहीं है। इतने में वह व्यक्ति 32 लाख रूपये को दिखाने के लिये कहने लगा जबकि मैं 30 लाख रूपया अपने कार्यालय में नहीं होने की बात कह रही थी, लेकिन रामानन्द सिंह कहने लगा कि आयकर वालों को गलत जा नकारी देना ठीक नहीं है, तलाशी लेंगे तो पैसा मिल जायेगा, फिर मामला मैनेज नहीं होगा, कहकर आलमारी में रखे 30 लाख रूपये की ओर ईसारा करके बताने लगा कि पैसा इसी आलमारी में रखा जाता है। आया हुआ आयकर अधिकारी दबाव देकर आलमारी का जांच करने के लिये कहकर खुलवाकर 32 लाख रूपया आलमारी से ले लिया और उसके बारे में मेरे को डांट-डपट करने लगा कि ये पैसा कहां से लाये हो, इसका कागज दो और रामानन्द सिंह उस व्यक्ति का हाथ-पैर जोड़ने लगा कि साहब आप इस पैसा को आप ले जाओ, ऐसे भी ये पैसा जप्त हो जायेगा और सिस्टर बुजुर्ग हैं, इनको परेशान मत करिये, कभी भी ये ऐसे लफड़े में नहीं फंसी है, कहकर 32लाख रूपये के बैग को लेकर वह व्यक्ति निकल गया और रामानन्द सिंह मेरे को डराने-धमकाने लगा कि 32 लाख रूपये देकर आयकर वालों से पीछा छूट गया है, नहीं तो इस उम्र में जेल हो जाता। रामानन्द सिंह के व्यवहार से सिस्टर को शंका होने पर बाद में उन्होंने कार्यालय के बाहर लगे सी.सी. फुटेज से उस आयकर अधिकारी के बारे में पता किया तो मालूम चला कि रामानन्द की महिला मित्र वंदना गुप्ता जो कि मितानिन कार्यक्रम में जिला समन्वयक है, उसका बहनोई राकेश गुप्ता रायगढ निवासी है। जिसके बारे में रामानन्द सिंह को कहे जाने पर शुरू में वह इंकार करता रहा, लेकिन बाद में दिनांक 14.08.2021 को स्टाफ के सामने पूछताछ किया गया तो रामानन्द सिंह पूरी बात को स्वीकार किया और बताया कि वो और वंदना गुप्ता ही पूरा योजना तैयार किये थे, जिसमें वंदना गुप्ता की बहन कमला गुप्ता और उसके पति राकेश गुप्ता को शामिल किया गया और योजना के तहत ही राकेश गुप्ता को आयकर अधिकारी बनाकर कार्यालय में रखे स्टाम्प के 32 लाख रूपये को वसूलने के लिये भेजा गया था और पूरे नाटक के अनुसार कार्यक्रम किया गया है।सिस्टर ने पुलिस को बताया कि पकड़े जाने पर रामानन्द सिंह माफी मांगने लगा और पूरा 32 लाख रूपये को सबसे वसूल करके दो माह के भीतर रामनवमी तक वापस करने को कहा। उसके आश्वासन के कारण उसके विरूद्ध तत्काल में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराया गया, लेकिन अभी तक उसके द्वारा पैसा वापस नहीं किया गया है और संस्था के बारे में उल्टा-सीधा दुष्प्रचार कर रहा है, ताकि पैसा वापस न करना पड़े। सिस्टर ने इस मामले में रामानन्द सिंह, वंदना गुप्ता, राकेश गुप्ता एवं कमला गुप्ता के विरूद्ध अपराध दर्ज करने की शिकायत की है फिलहाल पुलिस सभी बारीकियों की जांच में जुटी है।
आदिवासियों के सेवा के आड़ में बड़े भूखंड लेकर बड़े-बड़े भवनों का निर्माण कर आदिवासी सेवा करने वाले संस्थाओं द्वारा बड़ी बेशकीमती जमीनों को बिक्री को लेकर भी लोगों के जेहन में सवाल खड़े हो रहे हैं ??आखिर सेवाभावी संस्थाएं में बने ट्रस्ट द्वारा इतनी बेशकीमती जमीनों को बेचकर लाखों रुपयों की उपयोगिता कहां की जावेगी ??पत्थलगांव एसडीओपी अलीम खान द्वारा राहा संस्था में फर्जी आयकर अधिकारी बनकर बतीश लाख के मामले में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि 32लाख रुपए के ठगी के मामले में हमारे द्वारा मामले की विवेचना के उपरांत ठगी के आरोपी राकेश गुप्ता को रायगढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया है वही इस मामले में एक फरार आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है। वही जमीन के मामले पर पूछने पर उनके द्वारा कहा गया कि बेशकीमती जमीन के मामले में भी उनके द्वारा जांच की जावेगी वहीं इस मामले में यदि और भी आरोपियों की संलिप्तता पाई जावेगी तो उस पर भी कार्यवाही की जावेगी।

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