बिना छुट्टी लिए कई विभागों के अधिकारी कर रहे मजे आखिर जिला प्रशासन से किस विभाग को मिली है छूट

मुकेश अग्रवाल
पत्थलगांव महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना विभाग के प्रोग्राम अधिकारी के लगातार बिना छुट्टी लिए डिजिटल साइन से भुगतान करने खबर प्रकाशित के बाद भी अभी तक किसी तरह की कोई कार्यवाही नही अभी तक कोई जांच नही क्या पत्थलगांव मनरेगा विभाग के प्रोग्राम अधिकारी को बिना छुट्टी लिए काम करने की प्रशासन के तरफ से छूट है या मनरेगा विभाग जो शासन की महत्वपूर्ण विभाग जो ग्रामीण इलाकों में रोजगार देने के लिए है। पर क्या उसके विकासखंड के मुख्य अधिकारी के डियूटी में नही रहने से कार्य प्रभावित नही हो रहा है। अगर प्रभावित हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसका है। जब कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को नही समझे और बिना छुट्टी लिए कार्य करना दिखाता रहे तो उच्च अधिकारियों का कार्यवाही करना जांच करना नही बनता है पर यही हो रहा है पत्थलगांव के प्रोग्राम अधिकारी नीलम तिर्की के लिए जो अपने मनरेगा विभाग में बिना किसी से छुट्टी लिए डिजिटल साइन से घर से ही भुगतान कर रही थी जिसका 20 नवम्बर को समाचार पत्र में खबर प्रकाशन कर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया था पर खबर प्रकाशन के 6 दिवस के बाद भी किसी तरह की कोई जांच कोई कार्यवाही नही की गई है।
इससे क्या ये समझा जाये कि ऑफिस में डियुटी करना जरूरी नही है या कुछ चुनिंदा अधिकारियों को जिला प्रशासन से छूट दी गई है। और अगर ये छूट दी गई है तो आखिर क्यों
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव मनोज तिवारी से जब पत्थलगांव मनरेगा विभाग के प्रोग्राम अधिकारी नीलम तिर्की के द्वारा बिना छुट्टी लिए गोल रहने की बात पूछी गई तो उन्होनें कहा की किसी भी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी को बिना छुट्टी लिए डियूटी नही करने पर कार्यवाही की जानी चाहिए थी अगर अभी तक प्रोग्राम अधिकारी के ऊपर कोई कार्यवाही नहि की गई है कोई जांच नही की गई है ये सीधा सीधा बतलाता है कि जिला प्रशासन के द्वारा उसे बचाया जा रहा है। जबकि अभी तक जांच टीम या कारवाही के आदेश जारी हो जाने चाहिए थे इससे ये समझना आसान होगा कि सब भगवान भरोसे सभी अधिकारी कर्मचारी बिना किसी जिम्मेदारी के कार्य कर रहे है।
पत्थलगांव जनपद सीईओ केके श्रीवास से मनरेगा विभाग के प्रोग्राम अधिकारी के लगातार अनुपस्थिति पे क्या कार्यवाही की गई है पूछने पर उन्होनें बताया कि मेरे द्वारा 19 नवम्बर को ही नोटिस जारी कर जबाब मांगा गया था जिसका जबाब मुझे अभी तक नही मिला है मैं प्रोग्राम अधिकारी एवं अन्य के उपस्थिति पंजी में अपसेन्ट रहने का आज बुधवार को भी मार्क किया गया है। एवं सभी बाते उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया है।
- अब देखना ये ही कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में उच्च अधिकारी एवं अधिनस्त कर्मचारी की मनमानी यू ही चलती रहेगी या इनपर लगाम कसी जाएगी विचारणीय प्रश्न है। कि आखिर कबतक जिम्मेदारी से कार्य नही करने पर जिला प्रशासन के द्वारा छूट दिया जाता रहेगा और मुख्यमंत्री के गृह जिले में मनमानी चलती
- रहेगी।




