64 लाख की बाउंड्रीवॉल पर फिर उठे सवाल! रोक के आदेश के बावजूद निर्माण जारी, पुरानी ईंटों पर प्लास्टर चढ़ाकर ‘दफन’ करने का आरोप कॉलेज की जमीन का सीमांकन किए बिना निर्माण पर बिफरे उपाध्यक्ष अजय बंसल, प्राचार्य ने भी एसडीएम से लगाई रोक की गुहार

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव। शासकीय ठाकुर शोभा सिंह महाविद्यालय पत्थलगांव में करीब 64 लाख रुपए की लागत से बन रही बाउंड्रीवॉल एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कुछ दिनों पहले नगर पंचायत उपाध्यक्ष अजय बंसल की शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे विभागीय एसडीओ ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों के चलते काम रुकवाया था। इसके बावजूद अब आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा दूसरी ओर से बाउंड्रीवॉल का काम फिर शुरू कर दिया गया है।

मामले को लेकर नगर पंचायत उपाध्यक्ष अजय बंसल ने 21 सितंबर 2026 को लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता को लिखित शिकायत भेजकर निर्माण कार्य पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में उन्होंने कहा है कि जब तक शासकीय महाविद्यालय की भूमि का विधिवत सीमांकन नहीं हो जाता, तब तक बाउंड्रीवॉल का निर्माण उचित नहीं है।

पहले रोक, फिर रास्ता बदलकर निर्माण?

शिकायत के मुताबिक पूर्व में बन रही बाउंड्रीवॉल में पुरानी ईंटों के इस्तेमाल और गुणवत्ता को लेकर आपत्ति सामने आई थी। इसके बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और काम रोकने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि इसके बाद पुरानी बाउंड्रीवॉल को यथावत छोड़कर दूसरी तरफ से निर्माण शुरू कर दिया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि नई बन रही दीवार में भी कथित रूप से पुरानी ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्हें प्लास्टर की मोटी परत से ढक दिया जा रहा है, जिससे निर्माण सामग्री दिखाई न दे।

पुरानी ईंटें अंदर, प्लास्टर ऊपर… सवाल बरकरार!

मामले में अब सवाल उठ रहा है कि जब गुणवत्ता को लेकर पहले ही आपत्ति दर्ज हो चुकी है तो उसी निर्माण में दोबारा ऐसी सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत क्यों सामने आ रही है?

नगर पंचायत उपाध्यक्ष का आरोप है कि मौके पर निर्माण की निगरानी करने वाले इंजीनियर और ठेकेदार की भूमिका भी जांच के दायरे में होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

सीमांकन के बिना बाउंड्रीवॉल पर भी बड़ा सवाल

अजय बंसल ने अपनी शिकायत में कॉलेज की भूमि के सीमांकन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि शासकीय कॉलेज की काफी भूमि पर अतिक्रमण अथवा कब्जे की स्थिति होने की आशंका है, इसलिए पहले राजस्व विभाग से विधिवत सीमांकन कराया जाना चाहिए। सीमांकन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कॉलेज की वास्तविक भूमि की सीमा कहां तक है और बाउंड्रीवॉल किस स्थान पर बनाई जानी चाहिए।

प्राचार्य ने भी एसडीएम से लगाई रोक की गुहार

मामले में ठाकुर शोभा सिंह महाविद्यालय के प्राचार्य आर.एस. कांत ने भी पत्थलगांव एसडीएम को आवेदन देकर बाउंड्रीवॉल का निर्माण रोकने की मांग की है। प्राचार्य की ओर से भी निर्माण को लेकर आपत्ति दर्ज कराए जाने से मामला और गंभीर हो गया है।

बताया गया है कि कॉलेज प्रबंधन की आपत्ति है कि बाउंड्रीवॉल कॉलेज की वास्तविक सीमा से हटकर अंदर की ओर बनाई जा रही है, साथ ही निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल हैं।

अब सवाल—किसके इशारे पर फिर शुरू हुआ काम?

एक ओर शिकायतें, दूसरी ओर निर्माण पर रोक की मांग और तीसरी ओर काम दोबारा शुरू होने के आरोप—इन सबके बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब निर्माण की गुणवत्ता और भूमि सीमा को लेकर आपत्तियां सामने आ चुकी हैं, तो निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की अनुमति किस आधार पर दी गई?

नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने पूरे मामले में एसडीएम पत्थलगांव सहित पीडब्ल्यूडी के उच्चाधिकारियों से शिकायत कर जांच और निर्माण पर रोक की मांग की है।

अब देखना यह है कि 64 लाख रुपए की इस बाउंड्रीवॉल की गुणवत्ता, पुरानी ईंटों के इस्तेमाल और कॉलेज की जमीन के सीमांकन के मामले में विभाग क्या कार्रवाई करता है? साथ ही निर्माण की निगरानी कर रहे जिम्मेदार इंजीनियर की भूमिका की जांच होती है या नहीं—यह भी आने वाले दिनों में बड़ा

सवाल बना हुआ है।

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