जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा अग्रसेन भवन: श्री राम जन्मोत्सव पर झूम उठा पत्थलगांव, इंदुमती रामायणी के अलौकिक वर्णन ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर “बेटियां दो कुल की तारणहार हैं, माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म” — कथा वाचिका इंदुमती रामायणी

 

 मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव।

पत्थलगांव नगर के अग्रसेन भवन में आयोजित सात दिवसीय श्री राम कथा इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनी हुई है। कथा के चौथे दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का ऐसा दिव्य और अलौकिक आयोजन हुआ कि पूरा कथा पंडाल “जय श्रीराम” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा। श्रीराम जन्म के पावन प्रसंग का अंतरराष्ट्रीय रामकथा वाचिका इंदुमती रामायणी ने अत्यंत भावपूर्ण, ओजस्वी और मनमोहक शैली में वर्णन किया, जिसे सुनकर हजारों श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।

पूरा अग्रसेन भवन भगवान श्रीराम के आकर्षक पोस्टरों, भगवा ध्वजों और मनोहारी सजावट से सुसज्जित दिखाई दिया। जैसे ही कथा में श्रीराम जन्म का प्रसंग आया, वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु अपने स्थानों से खड़े होकर “जय श्रीराम”, “सियावर रामचंद्र की जय” और “बोलो रघुनंदन लाल की जय” के जयघोष करने लगे। पूरा पंडाल मानो अयोध्या धाम में बदल गया।

कथा वाचिका इंदुमती रामायणी ने कहा कि रावण केवल एक शक्तिशाली योद्धा ही नहीं, बल्कि महान विद्वान और पराक्रमी पंडित भी था। उसने कठिन तपस्या कर ब्रह्माजी एवं भगवान शंकर से अनेक वरदान प्राप्त किए थे, लेकिन अहंकार और अधर्म ने उसके पतन का मार्ग तैयार किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं और श्रीराम का अवतरण भी इसी उद्देश्य से हुआ।

श्रीराम जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजकों ने विशेष तैयारियां की थीं। जैसे ही भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग आया, शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और जयघोष के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय उल्लास से भर उठा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को श्रीराम जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं। कथा वाचिका ने सभी भक्तों को शुभाशीष देते हुए प्रसाद वितरित कराया।

अपने प्रेरक उद्बोधन में इंदुमती रामायणी ने समाज को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि “बेटियां दो कुल की तारणहार होती हैं। एक बेटी अपने मायके और ससुराल, दोनों कुलों का मान-सम्मान बढ़ाती है। इसलिए बेटियों का सम्मान और संरक्षण प्रत्येक परिवार का प्रथम कर्तव्य है।”

उन्होंने कहा कि एक नारी ही बेटी, बहन, पत्नी और मां के रूप में पूरे परिवार को जोड़कर रखती है। मां से बढ़कर इस संसार में कोई शक्ति नहीं है। यदि हम जीवन में सचमुच सफल होना चाहते हैं तो अपने माता-पिता की सेवा, सम्मान और आज्ञा का पालन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि भले ही हम दिनभर व्यस्त रहें, लेकिन माता-पिता के लिए प्रतिदिन कुछ समय अवश्य निकालें, क्योंकि उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

श्रीराम जन्मोत्सव के इस भावपूर्ण मंचन में महाराज दशरथ की भूमिका जग्गी अग्रवाल ने निभाई, जबकि माता कौशल्या की भूमिका उनकी धर्मपत्नी ने अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत की। दोनों के अभिनय ने श्रद्धालुओं को अयोध्या के उस दिव्य क्षण का साक्षात अनुभव करा दिया।

पूरे आयोजन को सफल बनाने में सरगुजा संभागीय अग्रवाल सभा के अध्यक्ष पवन अग्रवाल, आयोजन समिति, अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों, महिला मंडल तथा युवा कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी व्यवस्था, अनुशासन और सेवा भावना की श्रद्धालुओं ने मुक्त कंठ से सराहना की।

सात दिवसीय श्री राम कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। भक्ति, संस्कृति और सनातन मूल्यों से सराबोर यह आयोजन पत्थलगांव के धार्मिक इतिहास में एक यादगार अध्याय बनता जा रहा है।

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