पत्थलगांव में गूंजा ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष, आज होगा प्रभु श्रीराम जन्म का दिव्य प्रसंग… कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब “जीवन का सबसे बड़ा धन बैंक बैलेंस नहीं, संतान और सत्कर्म हैं” — अयोध्या की कथा वाचिका इंदुमती रामायणी

 

मुकेश अग्रवाल

पत्थलगांव। अग्रसेन भवन में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा इन दिनों पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर रही है। कथा के चौथे दिवस आज वह बहुप्रतीक्षित और दिव्य क्षण आने वाला है, जिसका श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रामकथा वाचिका इंदुमती रामायणी (अयोध्या) आज प्रभु श्रीराम जन्मोत्सव का अद्भुत, भावपूर्ण और जीवंत चित्रण प्रस्तुत करेंगी। आयोजन समिति के अनुसार श्रीराम जन्म के इस प्रसंग में पूरा कथा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष, भजनों और भक्तों की अपार श्रद्धा से गूंज उठेगा।

इससे पहले तीसरे दिवस कथा वाचिका ने भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया कि कथा पंडाल में बैठे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भक्ति, हास्य, करुणा और आध्यात्मिक संदेशों से सजी कथा के दौरान अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

कथा वाचिका इंदुमती रामायणी ने समाज को गहरी सीख देते हुए कहा कि “जीवन में सबसे बड़ा धन बैंक बैलेंस, कोठी या बंगला नहीं, बल्कि संतान और उसके संस्कार हैं। धन-दौलत केवल क्षणिक सुख देती है, लेकिन संतान परिवार और समाज की सबसे बड़ी पूंजी होती है।”

उन्होंने कहा कि मनुष्य इस संसार में अकेला आता है और अकेला ही जाता है। साथ जाता है तो केवल उसके पाप और पुण्य। उन्होंने कहा कि करोड़ों की संपत्ति, बैंक बैलेंस और आलीशान मकान यहीं रह जाते हैं, इसलिए मनुष्य को जीवनभर अच्छे कर्म, सेवा, भक्ति और भगवान के नाम का स्मरण करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

अपने उद्बोधन में उन्होंने बढ़ती दहेज प्रथा पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में विवाह में प्रेम और आशीर्वाद स्वरूप उपहार दिए जाते थे, लेकिन आज उपहार की जगह दहेज की कुप्रथा ने ले ली है। इसका सबसे अधिक बोझ गरीब परिवारों पर पड़ता है, जिन्हें योग्य और गुणवान बेटियों के लिए भी अच्छा वर तलाशने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने पारिवारिक जीवन की महत्ता बताते हुए कहा कि स्त्री के लिए विवाह के बाद सास-ससुर की सेवा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी माता-पिता की। परिवार में प्रेम, सम्मान और संस्कार ही वास्तविक सुख का आधार हैं।

कथा के दौरान जब उन्होंने भावपूर्ण भजन—

“बाबुल का घर ये बहना, कुछ दिन का ठिकाना है… बनके दुल्हन एक दिन तुझे जाना है…”

प्रस्तुत किया तो पूरा कथा पंडाल भावनाओं से भर उठा। अनेक श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रुधारा बह निकली और वातावरण पूरी तरह भक्तिरस में डूब गया।

अग्रसेन भवन में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। कथा स्थल पूरी तरह श्रीराममय नजर आ रहा है। भजनों की मधुर प्रस्तुतियां कथा वाचिका के साथ आए कलाकारों द्वारा इतनी मनमोहक शैली में दी जा रही हैं कि श्रद्धालु घंटों तक मंत्रमुग्ध होकर कथा का रसपान कर रहे हैं।

आयोजन को सफल बनाने में सरगुजा संभागीय अध्यक्ष पवन अग्रवाल, जग्गी अग्रवाल सहित नगर के अनेक समाजसेवियों और श्रद्धालुओं का सराहनीय सहयोग मिल रहा है।

प्रतिदिन प्रातः भगवान शिव का सामूहिक रुद्राभिषेक भी श्रद्धा और विधि-विधान से संपन्न हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। कथा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण भी किया जा रहा है।

आज श्रीराम जन्मोत्सव के दिव्य प्रसंग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक धर्मप्रेमियों से समय पर पहुंचकर इस अलौकिक कथा का लाभ लेने और प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव के साक्षी बनने की अपील की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button